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अल्पसंख्यकों ने आज से पहले ऐसा समय कभी नहीं देखा: जस्टिस MSA सिद्दीकी

नई दिल्ली: नेशनल कमीशन फॉर माइनोरिटीज एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस एमएसए सिद्दीकी ने कहा है कि आजादी के बाद यह पहला मौका है जब अल्पसंख्यकों को ऐसी मुश्किल भरे दौर का सामना करना पड़ा है।

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अल्पसंख्यकों ने ऐसे दिन कभी इससे पहले किसी सरकार में नहीं देखे थे जो आज उन्हें देखना पड़ रहा है। हालांकि राज्य या सरकार मौलिक अधिकारों की रक्षक और निगेहबान होती है, लेकिन अल्पसंख्यकों और कमजोर तबकों के अधिकारों की खुले तौर पर उल्लंघन हो रही है।

जस्टिस सिद्दीकी ने नई दिल्ली में ” शांतिपूर्ण सहअस्तित्व: संभावना, कठिनाइयां और स्थिरता” के विषय पर आयोजित एक गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ‘कोई राजनीतिक दल अल्पसंख्यकों के वोटों के बिना चुनाव में तो कामयाबी हासिल कर सकती है। लेकिन वह उनके बिना देश को शांतिपूर्ण और सही तरीके से चला नहीं सकती है। देश तेजी से एकल पार्टी शासन (तानाशाही) की ओर बढ़ रहा है और इस मामले में संसद की जरूरत नहीं रह जाएगी।

प्रतिभागीयों ने कहा कि देश में बहुत तेजी से सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, राजनीतिक और अन्य सतहों पर असमानता और अंतर बढ़ रहा है, जो समुदाय और क्षेत्र हाशिए पर हैं वे अधिक पीछे की ओर जा रहे हैं। यह बात देश के पक्ष में अच्छी नहीं। यहाँ तक कि एक प्रतिशत अमीरों के पास देश की 58 प्रतिशत आबादी के संसाधन हैं।

देश के बदलते हुए गंभीर स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए जस्टिस सिद्दीकी ने कहा कि बढ़ती आक्रामक राष्ट्रवाद ने देश में एक सामाजिक तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। उन्होंने एक मवेशी सुरक्षा के नाम पर हो रहे अत्याचार व हिंसा की पृष्ठभूमि पर कहा कि जब किसी चर्च में आग लगाई जाती है तो पुलिस भी दोषियों को नहीं पकड़ते है। इससे पहले धार्मिक अल्पसंख्यकों पर ऐसा समय कभी नहीं आया था। लॉ एंड ऑर्डर नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। इससे दुनिया में देश की बड़ी बदनामी हो रही है।

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