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उमा भारती की माँ को कैंसर, मगर बेटी के पास नहीं है इलाज के लिए वक़्त

मदर्स डे पर पूरी दुनिया मां को सलाम कर रही है। कोई सच्चे दिल से तो कोई दिखावटी-बनावटी तौर-तरीकों से अपनी-अपनी मां को बधाई दे रहा है और उनकी सेवा करने का वादा कर रहा है।

लेकिन मोदी सरकार की मंत्री और हिंदुत्व की झंडाबरदार उमा भारती की मां सिसक रही हैं। उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी है, लेकिन बेटी के पास वक़्त ही नहीं है ।

जी हां उमा भारती ने हज़ारों लोगों के सामने ऐलान किया था कि गंगा मैय्या उनकी सगी मां हैं, और वो गंगा मां को गंदगी रूपी कैंसर से मुक्ति दिलाकर रहेंगी। अफसोस की बेटी का वादा वादा ही रह गया मां आज भी दर्द में कराह रही है ।

किसी को घर मिला, किसी के हिस्से में कोई दुकां आई, मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में मां आई

मशहूर शायर मुन्नवर राणा के इसी शेर के साथ 19 जुलाई 2016 को कानपुर के गंगा बैराज पर उमा भारती ने ऐलान किया था कि गंगा को दुनिया मैया कहती हैं, लेकिन आज से गंगा मईया मेरी सगी मां हैं।

‘नमामि गंगे’ योजना के तहत कानपुर में गंगा की दशा देखने पहुंची उमा भारती गंगा में गंदगी का कैंसर देखकर दुखी थीं। उन्होंने वादा किया था कि कुछ भी हो जाए, लेकिन एक साल में गंगा मइया को निर्मल बना दिया जाएगा।

गंगा मां के कष्टों को दूर करने के लिए मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री ने संकल्प लिया था कि 45 दिन में सीसामऊ नाले को गंगा में गंदगी उड़ेलने से रोका जाएगा।

लेकिन लहरों से निकलने वाली आवाज बार-बार कह रही है कि बेटी राजनीति नहीं करो, मेरे जख्म में मरहम लगाओ। अगर इलाज नहीं हुआ तो आने वाले दिन में मैं इस दुनियां से चली जाऊंगी, तुम फिर किसके सहारे रहोगी।

अफसोस, गंगा की मुंहबोली बेटी उमाभारती के बोल सिर्फ जुमले साबित हुए। एक साल में गंगा की बेहतरी के लिए धरातल पर कुछ भी नहीं हुआ। केंद्रीय मंत्री की बेजुबान मां आज भी गंदगी के कैंसर के कारण दर्द से कराह रही है और दर्जनों नालों का कैमिकल युक्त पानी गंगा के आंचल में समा रहा है।

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस साल गंगा का पानी ज्यादा प्रदूषित हुआ है। बिठूर से लेकर सरसौल तक एक भी घाट ऐसा नहीं है, जहां ए या बी कैटेगरी का पानी गंगा में मिला है।

यूं तो गंगा के लिए उमा भारती पहले भी बयानबाजी कर चुकी हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान कानपुर दौरे के दौरान परमट घाट पर उमा भारती ने स्नान-ध्यान के बाद ऐलान किया था कि यदि केंद्र भी भाजपा की सरकार बनती है तो एक साल के अंदर गंगा के जल को निर्मल कर देंगे।

भाजपा की सरकार भी बन गई और उमा भारतीय को जल संसाधन विभाग का दायित्व भी। बावजूद गंगा की दशा में कोई बदलाव नहीं आया।
शहर में मोक्षदायिनी गंगा की सफाई का सफर वर्ष 1989 में शुरू हुआ। नीदरलैंड सरकार की मदद से गंगा एक्शन प्लान चलाया गया। दो चरण में गंगा एक्शन प्लान शुरू हुआ। इसमें 166 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उस समय शहर से गंगा में 200 एमएलडी यानी 20 करोड़ लीटर गंदा पानी गिरता था। लेकिन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट 162 एमएलडी यानी 16.2 करोड़ लीटर का बनाया गया।

इस तरह 38.38 करोड़ लीटर एमएलडी गंदा प्रदूषित पानी गंगा में ही गिरता रहा। बीते 28 साल में शहर का विस्तार होने के साथ गंदे पानी की मात्र भी बढ़ती गई। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान में शहर से 460 एमएलडी यानी 46 करोड़ लीटर सीवेज रोज निकलता है। इस दौरान गंगा एक्शन प्लान से जाजमऊ में बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता सिर्फ 162 एमएलडी पानी ही ट्रीट करने की है। रखरखाव के चलते 100 एमएलडी ही ट्रीट हो पा रहा है। शेष 36 करोड़ लीटर दूषित पानी सीधे गंगा में गिरता है।

गंगा को साफ करने के लिए वर्ष 2005 में जवाहर लाल नेहरू नेशनल अरबन रिन्यूवल मिशन योजना लाई गई। इसके तहत तीन फेज में योजना बनाई गई। 7 अरब रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके तहत कुल 31 करोड़ लीटर क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बने हैं। इसमें से अभी तक बिनगवां में बना 21 करोड़ लीटर का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट चालू हो पाया है। वह भी सिर्फ सात करोड़ लीटर पानी ट्रीट कर रहा है। वह भी रोज नहीं हो पाता है। बाकी अनियोजित प्लानिंग में लटके हुए हैं।

गंगा की सफाई में अब तक नौ अरब रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन गंगा साफ होने की जगह पहले से अधिक दूषित हो गई हैं। गंगा बैराज से दो किलोमीटर दूर मैगजीन घाट का हाल यह है कि घाट से लगभग 50 मीटर दूर चलने के बाद ही गंगाजल मिल पाता है। क्षेत्र के लोग कहते हैं कि स्नान करने के लिए दो फीट गहरी गंगा को पार कर दूसरी तरफ डुबकी लगाने जाना पड़ता है।

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