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समय की सियासत के शिकार बड़े राजनेता

लखनऊ: (सियासत संवाददाता): राजनीति के रंग भी अजीब होते हैं. कभी जिस नेता के इशारे पर लोगो को टिकट मिलते और कटते थे वो आज पीछे हो गए हैं. चुनाव के समय पार्टी में उनकी पूछ होती थी, उनके आगे पीछे कार्यकर्ता और दूसरे नेता लगे रहते थे, पार्टी के टिकट बटवारे में उनकी अहम् भूमिका होती थी.

सिर्फ इतना नहीं चुनाव के समय उनके प्रोग्राम लगते थे, उम्मीदवार चाहते थे कि वो लोग उनके क्षेत्र में एक सभा कर दें. लेकिन समय के फेर ने उनके भी दिन फेर दिए.

आज अपनी ही पार्टी में बेगाने हो गए. आएये देखते हैं कुछ ऐसे बडे नामो को जिनके इर्द गिर्द राजनीति घूमती थी लेकिन अब वो बात नहीं रही.

मुलायम सिंह यादव, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, पार्टी के सर्वेसर्वा. आज बात बदल गयी हैं. अब पार्टी अखिलेश के हाथो में हैं. मुलायम भी पलटी मार रहे हैं, कभी कहते हैं आज प्रचार करूंगा, कभी कुछ. इस बार हालात ये हैं की मुलायम के प्रोग्राम तक किसी उम्मीदवार ने नहीं मांगे. अभी तक कोई सभा भी नहीं की.

अपने बहुत से करीबियों को टिकट दिलाना तो दूर उनको पार्टी में भी नहीं बचा पाए. ऐसे कमज़ोर मुलायम कभी नहीं दिखे.

शिवपाल यादव, मुलायम के भाई हैं. चुनाव में उनका जलवा कम नहीं होता था. तमाम टिकट लेने के लिए कैंडिडेट उनके आगे पीछे घुमते थे. लेकिन अब हालात दूसरे हैं, पार्टी में पद, सरकार में मंत्री पद सब चला गया. समर्थक भी पार्टी से बाहर कर दिए गए.

आज शिवपाल केवल अपनी विधान सभा तक सीमित कर दिए गए हैं. कहीं जाने का कोई चारा भी नहीं क्योंकि कोई बुला भी नहीं रहा. उनके समर्थक सब पार्टी से बाहर हैं इसीलिए भीड़ भी कम हैं.

अमर सिंह, कभी अपने को मुलायम का दर्जी कहने वाले और मुलायम का दावा की उनकी बात सिर्फ अमर सिंह समझ सकते हैं, लेकिन आज अमर सिंह चुनाव से दूर हैं. अखिलेश यादव के अनुसार वो बाहरी हो गए हैं.

सपा में लौटे तो लगा की पुराने दिन बहाल हो जायेंगे लेकिन हालात बदले नहीं. पार्टी की गतिविधियों से दूर हो गए. एक दिन तो यहाँ तक कह दिया की मुझे अखिलेश के अधिकारी मिलने का समय नहीं दे रहे हैं. इस चुनाव में अमर सिंह की भूमिका ख़त्म सी हैं. जया प्रदा, अमर सिंह की करीबी, पूर्व सांसद, कभी सपा का चेहरा बन चुकी थी. लेकिन इस बार कोई भूमिका नहीं. बहुत कोशिश हुई लेकिन जब अमर सिंह ही कुछ नहीं चले तो आगे क्या होता.

बहरहाल इस बार प्रचार में भी नहीं जा रही हैं. विनय कटियार, ज़माना था जब कटियार का प्रोग्राम हर भाजपाई अपने क्षेत्र में चाहता था. प्रदेश अध्यक्ष भी रहे, हिंदुत्व के मुद्दे पर खूब चले. लेकिन इस बार पार्टी में वो जलवा नहीं हैं. पहली लिस्ट में स्टार प्रचारक भी नहीं बन पाए. दूसरे को टिकट तो रहने दीजिये अपने क्षेत्र फैजाबाद में भी उनकी चली और टिकट बाँट दिए गए.

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