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योगी सरकार का मैरिज रजिस्ट्रेशन कराने का फैसला धार्मिक आजादी के खिलाफ है: दारुल उलूम

लखनऊ: यूपी में सत्तारूढ़ योगी सरकार ने राज्य में मैरिज रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य कर दिया है। जिसका दारुल उलूम देवबंद द्वारा विरोध किया जा रहा है। उन्होंने सीएम योगी के इस फैसले को गैर जरूरी बताते हुए कहा की ऐसा करना धार्मिक आजादी के खिलाफ है।

दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने योगी सरकार के मैरिज रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने का फैसले को गैर-जरूरी बताया और कहा है की वह रजिस्ट्रेशन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जबरदस्ती किसी पर भी रजिस्ट्रेशन थोपना सही नहीं है। ये हमें संविधान द्वारा मिली धार्मिक आजादी के खिलाफ है।
दारुल उलूम वक्फ के शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी ने कहा कि मैरिज रजिस्ट्रेशन न कराने वाले पर जुर्माना या उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई किया जाना सही नहीं है।

दारुल उलूम के वरिष्ठ मुफ्ती आरिफ कासमी ने कहा कि इस फैसले से गाँव वाले और कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है। हमें शादी के पंजीकरण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसा न करने वालों को सरकारी सुविधाओं से वंचित रखने का फरमान उत्पीडऩ है।

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