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मुस्लिम ने लिखी थी हिन्दू धर्मस्थल ‘बदरीनाथ धाम’ में 151 सालों से गाए जाने वाली आरती

देहरादून: हिन्दू धर्म में चार धाम की यात्रा का बेहद महत्व जिनमें से एक हैं उत्तराखंड के चमोली गाँव में स्थित बद्रीनाथ धाम।

हिंदू देवता शिव जी का ये मंदिर अपने भीतर भाईचारे की एक ऐसी मिसाल समेटे हुए है जिसे देश के बहुत कम ही लोग जानते होंगे।

ये बात तो हम सभी जानते हैं कि हिन्दू धर्मस्थलों में पूजा और तमाम धार्मिक अनुष्ठान सिर्फ ब्राह्मण समाज के लोग ही करते हैं।

लेकिन इतिहासकार डॉ. एम. एस. गुसाईं ने बताया है कि बद्रीनाथ धाम एक ऐसा मंद‌िर है, जिसके दरवाजे खुलने पर होने वाली परंपरागत पूजा आज भी सालों पहले एक मुस्ल‌िम शख्स की लिखी आरती की पावन धुन के साथ तीनों पहर आरती की जाती है।

पिछले 151 सालों से इस मंदिर में सुबह-शाम होने वाली आरती चमोली के एक युवा मुस्लिम शायर ने लिखी थी। जिसका नाम फकरुद्दीन उर्फ़ बदरुद्दीन था और वह चमोली जिले के नंदप्रयाग में रहता था।

डॉ. एम. एस. गुसाईं ने बताया कि 18 साल के फकररुद्दीन गाँव के पोस्टमास्टर हुआ करते थे। जब उन्होंने ये आरती लिखी थी।
जिसमें उन्होंने द्रीनाथ धाम के धार्मिक महत्व के अलावा यहां की सुंदरता का भी वर्णन भी बखूबी किया है।

बदीनाथ के लिए आरती लिखने के बाद उन्होंने अपना नाम फकरुद्दीन से बदलकर बदरुद्दीन भी रख लिया था। 104 साल की उम्र में साल 1951 में बदरुद्दीन का निधन हो गया लेकिन उनके द्वारा लिखी गई आरती आज भी मंदिर में गाई जा रही है।

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