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मेरठ: वंदे मातरम नहीं कहने पर मुस्लिम पार्षदों की सदस्यता रद्द!

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के नगर निगम बोर्ड के भाजपाई महापौर ने जहां वन्देमातरम के सम्मान के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ने का ऐलान कर दिया है तो कई मुस्लिम पार्षद किसी भी कीमत पर वंदेमातरम नहीं बोलने पर अड़े हुए हैं। इस विषय पर विपक्षी पाषर्दों के रुख को देखते हुए महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने वंदेमातरम का विरोध करने वाले पाषर्दों की सदस्यता समाप्त करने और ऐसे सदस्यों को सदन में नहीं बैठने का प्रस्ताव रखा, जिसे भाजपा सदस्यों ने पास कर दिया।

 

 

मुस्लिम पार्षदों द्वारा वंदेमातरम नहीं गाए जाने को लेकर माहौल बुधवार को भी गर्म रहा। मुस्लिम पार्षदों ने यह कहकर वंदेमातरम गाने से मना कर दिया कि यह शरीयत के खिलाफ है। वे बैठक में वंदेमातरम नहीं गाएंगे भले ही उन्हें सदस्यता छोड़नी पड़ जाए। मंगलवार को निगम की बैठक शुरू होने से पहले वंदे मातरम के दौरान 7 मुस्लिम पार्षद बाहर चले गए थे।

 

 

महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने फिर दोहराया कहा कि वंदेमातरम का अपमान कतई सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम बोर्ड बैठक में इस आशय का एक प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है। महापौर ने सपा पाषर्दों पर राष्ट्रगीत का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा को छोड़ शेष सभी दलों के पार्षद वंदेमातरम को लेकर गंभीर हैं।

 

 

उधर, विपक्षी पार्षद शाहिद अब्बासी ने कहा कि हमें शक की नजरों से देखा जा रहा है जबकि हम देश के लिए अपनी जान भी कुर्बान करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने वंदेमातरम पर स्थिति साफ करते हुए कहा कि हमने वंदेमातरम का विरोध नहीं किया है, हम तो अन्य लोगों की भावनाओं का आदर करते हुए उठकर चले आए थे।
वहीं पार्षद दीवान शरीफ और अरशदउल्ला ने कहा कि वंदेमातरम को हमारा मजहब स्वीकार नहीं करता इसलिए हमें पार्षद पद से इस्तीफा देना मंजूर है लेकिन वंदेमातरम नहीं गाएंगे। इन पार्षदों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की जा रही है, हम न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। गौरतलब है कि वर्तमान नगर निगम बोर्ड में पिछले करीब चार साल से वंदेमातरम को लेकर विवाद खड़ा होता रहा है।

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