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ऐसी गौशाला जहाँ सड़क पर छोड़ दी गई बीमार और बूढ़ी गायों की पालते हैं मुसलमान

राजस्थान: मौजूदा वक़्त में जहाँ मुसलामानों पर गौतस्करी और गौहत्या के आरोप लगाए जा रहे है, वहीँ इस बीच जोधपुर में एक मुस्लिम शख्स हाजी अतीक की कहानी की खूब चर्चा है जिनके गाय के प्रति प्यार के सभी कायल हैं।

दरअसल बीकानेर रोड पर स्थित गौशाला जोकि जोधपुर की मुस्लिम एजुकेशनल ऐंड वेलफेयर सोसायटी द्वारा चलाई जा रही है। हाजी अतीक इस गौशाला के महासचिव हैं। इस गौशाला में 200 से ज्यादा गायें मौजूद हैं और ये इस इलाके की सबसे बड़ी गौशाला है।

यहाँ पर ज्यादातार बीमार और बूढ़ी गाय रहती हैं जिन्हे अक्सर मतलब निकल जाने पर लोग र देते हैं। इन गायों के लिए डॉक्टरों की एक टीम का ख़ास प्रबंध हैं।

इसे पिछले 8 साल से चलाया जा रहा है लेकिन शान्ति और भाईचारे का सन्देश लोगों में बांटती इस गौशाला का कभी भी प्रचार नहीं किया गया। गायों के लिए हर रोज ट्रक भर कर चारा आता है।

पेशे से शिक्षक हाजी अतीक का कहना है कि गायों का ध्यान रखना उनके लिए अपनी मां का ख्याल रखने जैसा है। मेरा मानना है कि गाय देश की सांझा हिंदू-मुस्लिम संस्कृति का प्रतीक है। हमारी टीम आसपास के इलाकों में नजर रखती हैं कि कहीं आवारा, बेसहारा, घायल, बूढ़ी और बीमार गायें हो या जो अपना पेट नहीं भर पा रही हो।

उन्हें वह हमारी गौशाला में मौजूद वाहन के जरिये यहाँ ले आते हैं। मैं हर दिन दोपहर की नमाज पढ़ने के बाद गोशाला आता हूँ और गायों को चारा खिलाता हूँ। यह संस्था आसपास के गांवों में बीमार गाय, भेड़,बकरी और भैसों का फ्री में इलाज करती है। जिसके चलते हर महीने इसके लिए 1 लाख से ज्यादा का खर्चा आता है।

हाजी अतीक बताते हैं कि इस गौशाला को शुरू करने का सफर संस्था के लिए बहुत ही मुश्किल भरा था। मुस्लिम समुदाय द्वारा चलाई जा रही इस गौशाला को खोलने पर कई लोगों ने आपत्ति जताई। उनका मानना था कि गौशाला के नाम पर गाय के मीट का व्यापार किया जा रहा है। लेकिन धीरे-धीरे लोगों हमारे इस कदम की तारीफ करना शुरू कर दिया और हमें काफी सराहना मिली।

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