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हिन्दू परिवार के पास पैसा नहीं था इसलिए मुसलमानों ने हिन्दू परम्परा के साथ किया अंतिम संस्कार

देश में मज़हब के नाम पर बढ़ती नफ़रत के बीच मुसलमानों ने मालदा में एकता और भाईचारे की मिसाल पेश की है। ख़बर है कि मालदा में एक हिंदू युवक का अंतिम संस्कार मुसलमानों ने किया।

मामला मालदा जिले के शेखपुरा गांव का है जहाँ कैंसर से जूझ रहे विश्वजीत की सोमवार को उनके घर पर मौत हो गई लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से उनके परिवार वाले अंतिम संस्कार का इंतज़ाम नहीं करा सके।

बाद इसके विश्वजीत के मुस्लिम पड़ोसियों ने आपस में मिलकर पैसे जुटाएं और हिन्दू रीति-रिवाजों से उनका अंतिम संस्कार किया।

इतना ही नहीं, अंतिम संस्कार के बाद मुस्लिम युवकों ने हिन्दू परंपरा के मुताबिक़ नदी में डुबकी भी लगाई।

विश्वजीत के पिता ने बताया कि मेरे पास न तो पैसे थे और न ही बेटे को श्मशान तक ले जाने के लिए शक्ति भी थी। मुझे नहीं पता कि क्या होता अगर गांव वाले मेरे बेटे के अंतिम संस्कार के लिए आगे नहीं आए होते।

दाह संस्कार के लिए आगे आने वाले हाजी अब्दुल ख़ालिक़ ने बताया कि कोई भी धर्म दूसरों के प्रति नफरत नहीं फैलाता। विश्वजीत हमारे भाई की तरह थे। मौलवी, हाजी और मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों ने विश्वजीत के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की।

मालदा जिला परिषद के गौड़ चंद्र मंडल ने कहा कि यह हमारे देश में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच भाईचारे का सबूत है।

अंतिम संस्कार में शामिल गाँव के अयेश अली ने कहा कि मुसीबत में एक परिवार की मदद करने और कुछ हिंदू नामों को जपने से मेरा धर्म भष्ट नहीं हो सकता है।

 

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