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यहाँ के मुसलमानों ने पेश की मिसाल, इफ़्तार छोड़कर रोज़ेदारों ने नदी में डूबते हिंदू युवक की जान बचाई

देश में मज़हब के नाम पर चाहे जितनी नफ़रत फैलाई जा रही हो लेकिन हमें आस-पास अक्सर ऐसे मामले देखने-सुनने को मिल जाते हैं जिससे एक बात साफ है कि हिन्दुस्तान के हिन्दू-मुस्लिम को कोई अलग नहीं कर सकता।

यह एक-दूसरे इस कदर जुड़े हुए है कि बरसो पुरानी बंधुत्व की इमारत को ढहाना नामुमकिन है। तमाम दुख और मुसीबतों को यहाँ के लोगों ने मिलजुल कर झेला है और एक-दूसरे की हमेशा मदद की है।

अब ख़ुद की जान जोखिम में डालकर एक हिन्दू युवक को बचाने वाले बलरामपुर के मुसलमानों ने मिसाल पेश की है।

दरअसल हुआ कुछ यूँ कि बीती 17 तारिख को एक युवक शहर के अंध्यारी बाग़ क़ब्रस्तान के क़रीब बने सुआओं पुल से गहरे पानी में कूद गया।

लेकिन उस कूदते हुए मोहम्मद नफ़ीस नाम के लड़के नें देख लिया और शोर मचाना शुरू कर दिया। इस बीच शोर सुन कर इफ्तारी के लिए बैठे सभी रोज़ादार पुल की तरफ़ भागे और पानी में डूब रहे नवजवान की जान बचाने की कोशिश में जुट गए।

बाद इसके किसी तरह बड़ी मुश्किल से पानी में उतर कुछ मुस्लिम लड़कों को उतारकर डूबता युवक को बचाया गया. इतना ही नहीं, उस युवक के जिस्म पर बड़ी संख्या में जोंक चिपक गई थी, जो युवक के जिस्म में घुस रही थी। जिसकी वजह से नवजवान घायल भी हो गया था।

हालाँकि पानी से निकलने के बाद युवक को थोड़ा होश आया लेकिन वह अपनी सही पहचान नहीं बचा पा रहा था. कभी अपनी नाम राजकुमार बताता तो कभी अभिषेक।

बहरहाल, उसके हाथ में लाल रंग का धागा बंधा था और एक छोटा सी माला भी हाथ में लिपटी थी। जिससे यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि हिन्दू है। हलांकि वह काफ़ी नशे में भी था और किसी भी सवाल का जवाब सही से नहीं दे पा रहा था।

सूत्रों की माने तो युवक के पानी में कूदने की सूचना कोतवाली नगर को दी गई मगर घण्टा बीत जाने के बाद कोई पुलिस कर्मी नहीं पहुँचा जिसके बाद घटना की सूचना संवाददाता नें पुलिस अधीक्षक को दी तब जा कर मौके पर पुलिस पहुंची।

 

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