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नसीमुद्दीन सिद्दीकी की बगावत बन रही मायावती मुसीबत

लखनऊ: बसपा से पैदल होने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके बेटे अफजल वेस्ट यूपी में पार्टी को कमजोर करने के अभियान में जुट गए। लेकिन उनके प्लान को खुद मायवती ने बेअसर किया। सिद्दीकी ने कई नेताओं को अपने खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर पार्टी छोड़ने के लिए टेलिफोन किए। लेकिन मायावती ने खुद नसीमुद्दीन के करीबी समझे जाने वाले इन नेताओं को कॉल की और उन्हें समझाया। बुधवार सुबह 10 बजे बीएसपी से निकालने के ऐलान की जानकारी मिलते ही नसीमुद्दीन और उनके बेटे अफजल अपने खास लोगों से संपर्क साधने में जुट गए थे। बीएसपी सूत्रों के मुताबिक, बीएसपी प्रमुख को भी दोनों की गतिविधियों की जानकारी मिलती रही। बहनजी के पास जानकारी पहुंची कि दोनों पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने पक्ष में पार्टी छोड़ने के लिए उकसा रहे हैं। वेस्ट यूपी के कई पूर्व विधायक और पूर्व जिलाध्यक्ष समेत जिला प्रभारी और दूसरे पदाधिकारी से पिता पुत्र संपर्क कर रहे हैं। हाल के विधानसभा चुनाव में बीएसपी प्रत्याशी रहे एक नेता ने माना कि नसीमुद्दीन की लगातार कॉल आई, लेकिन एक बार सुनने के बाद फिर अटैंड नहीं की। दूसरे प्रत्याशी का कहना है कि फोन नसीमुद्दीन के खुद के नंबर से भी और अन्य नंबरों से भी आए, लेकिन रिसीव नहीं किए। इसी तरह एक पूर्व विधायक से बात हुई। उन्होंने सोचकर विचार करने की बात कह पीछा छुड़ाया। नसीमुद्दीन और अफजल के पार्टी के खिलाफ ऐक्टिव होने के बाद खुद बहनजी ने कमान संभाली। उन्होंने ऐसे लोगों से फोन पर बात की जिनको नसीमुद्दीन सिद्दीकी पार्टी छोड़ने के लिए कह रहे थे। माना जा रहा है कि मायावती के खुद कमान संभालने के वजह वेस्ट यूपी से नेताओं ने पार्टी नहीं छोड़ी। जिन लोगों ने छोड़ी है, उनमें पूरब के ज्यादा हैं। वेस्ट से मेरठ के पूर्व जिलाध्यक्ष अश्वनी जाटव और नसीमुद्दीन के कारोबारी दोस्त अमरोहा के हाजी शब्बन ने ही पार्टी छोड़ी है।

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