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हिंदू शास्त्रों में गोमांस खाना अपराध नहीं, बहस के लिए मोहन भागवत को चुनौती देता हूँ: डी पी त्रिपाठी

हिंदू शास्त्रों में गोमांस का सेवन अपराध नहीं है। राकांपा नेता डी पी त्रिपाठी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को इस मुद्दे पर बहस करने के लिए चुनौती दी है।

भागवत ने हाल ही में गाय के वध पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। राकांपा के महासचिव डी पी त्रिपाठी ने गौरक्षकों की गतिविधियों को हिंदू विरोधी बताया।

पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्त्ता में उन्होंने कहा, वेदों में कहीं नहीं लिखा है कि बीफ़ खाना अपराध है। ना यह शास्त्रों में है और ना ही वेदों में। मैं भागवत या उनके किसी भी प्रतिनिधि को हिंदू शास्त्रों के आधार पर इस मुद्दे पर बहस की चुनौती देता हूं। उन्होंने दावा करते हुए कि अधिकांश हिंदुओं सहित 80 प्रतिशत देशवासी मांस खाते है।

त्रिपाठी ने कहा कि भागवत का गौहत्या पर प्रतिबंध वाला विचार संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि स्वामी विवेकानंद, जिनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रशंसा करते हैं, न केवल मांस खाते थे बल्कि मांसाहारी भोजन बनाते भी थे।

यहां संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने यह भी मांग  कि गुजरात सरकार द्वारा विधानसभा में पारित उस कठोर कानून को निरस्त कर दिया जाए जिसमें गौवध करने वाले को आजीवन कारावास का प्रावधान है।

त्रिपाठी ने यह भी कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाली को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने कहा है कि वह संपूर्ण राज्य को शाकाहारी करने के पक्ष में हैं।

बता दें कि एनसीपी नेता ने तर्क दिया कि 1 अप्रैल को पारित गुजरात पशु संरक्षण (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य जनजातीय, दलित, मुस्लिम और ईसाई अल्पसंख्यकों को मांस/बीफ खाने वालों के रूप में उत्पीड़ित करना है।

 

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