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महिला के गर्भाशय में छोड़ी सुई : अस्पताल को लापरवाही के लिए 30 लाख का भुगतान करने को कहा

नई दिल्ली। दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद आयोग ने प्रसव के बाद एक महिला के गर्भाशय में सूई छोड़ देने जैसी गंभीर लापरवाही के मामले में एक निजी अस्पताल पर 30 लाख रूपए का हर्जाना लगाया है। आयोग ने उत्तर दिल्ली के श्री जीवन अस्पताल की अपील को नकारते हुए जिला फोरम के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें उत्तर पूर्व दिल्ली निवासी रबीना को यह हर्जाना देने का आदेश दिया।

 

 

 

उसने यह भी टिप्पणी की कि योग्य चिकित्सक रखने की बजाय अस्पताल ने यह सारा काम फार्मेसिस्ट से कराया। एनपी कौशिक की अगुआई वाली पीठ ने कहा कि कोई प्रशिक्षित चिकित्सक रखने की बजाए अस्पताल यह काम फार्मेसिस्ट से करा रहा है।

 

 

 

आयोग ने कहा कि अस्पताल की ओर से दाखिल अपील खारिज की जाती है। अस्पताल को लापरवाही और सेवा में कमी के कारण 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाता है। अस्पताल इस राशि को उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराएगा।

 

 

 

शिकायत के अनुसार रबीना को 15 फरवरी 2009 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उसने एक बच्ची को जन्म दिया था। डिलीवरी के दौरान डाक्टर ने उसके गर्भाशय में एक सूई छोड़ दी थी जिसके कारण उसे लगातार दर्द तथा रक्तस्राव हो रहा था लेकिन इसके बावजूद अस्पताल ने उनकी समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया।

 

 

 

बाद में एक्सरे में गर्भाशय में सुई होने का पता चलने पर उसी अस्पताल में उसे हटा दिया गया। नवंबर 2009 में एक अल्ट्रासाउंड में पता चला कि रबीना का गर्भाशय क्षतिग्रस्त हो गया है और अब वह दोबारा गर्भधारण नहीं कर पाएगी।

 

 

 

उसके बाद उसने अस्पताल के खिलाफ पुलिस और उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। अस्पताल ने शुरुआत में गर्भाशय में सुई होने से इंकार किया था हालांकि बाद में उसने यह आरोप स्वीकार कर लिया।

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