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NEET परीक्षा से उर्दू को हटाने को लेकर डाली याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इंकार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (एनईईटी-यूजी) में उर्दू को शामिल नहीं किए जाने को लेकर स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (आईएसओ) के तरफ से डाली गई याचिका पर सुनवाई करने के मना कर दिया है।

गौरतलब है कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आगामी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) में उर्दू को बाहर कर दिया है। अब सरकारी और निजी कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस, बीएचएमएस जैसे मेडिकल की परीक्षा उर्दू में नहीं होंगे।

बता दें कि सरकार के इस फैसले से 20,000 से अधिक उर्दू माध्यम से पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। हालांकि साल 2013 में कोर्ट ने  इसको परीक्षा में शामिल करने को कहा था।

स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया का कहना है कि सरकार का यह फैसला असंवैधानिक और उर्दू माध्यम के छात्रों के साथ भेदभाव करने वाला है। इसी को लेकर आईएसओ सुप्रीम कोर्ट गई थी लेकिन इस पर सुनवाई करने से गुरूवार को मना कर दिया।

आईएसओ का कहना है कि अब उर्दू पढ़ने वाले छात्रों को किसी ऐसे अपरिचित पाठ्यक्रमों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसमें भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान जैसे विषय नहीं होंगे।

संस्था का कहना है कि जब ओडि़या और कन्नड़ जैसे भाषा को एनईईटी में जगह मिल सकती है तो उर्दू को क्यों नहीं। आईएसओ आरोप लगाती रही है कि सरकार जान-बुझकर उर्दू को निशाना बना रही है ताकि अल्पसंख्यक समुदायों के लिए उच्च शिक्षा में आना कम हो जाए।

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