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दलित-मुसलमान फोर्मुले से इतर मायावती की नई सोशल इंजीनियरिंग

अब जब चुनाव पश्चिम से आगे निकल कर मध्य और पूर्वांचल की तरफ बढ़ चला हैं तो बसपा प्रमुख मायावती ने भी अपना फोकस पूर्वांचल पर कर लिया हैं। सरकार बनाने का दावा करने वाली बसपा ने अब माइक्रो मैनेजमेंट पर ध्यान देना शुरू कर दिया हैं।

अभी तक मुस्लिम वोटो पर नज़र रखते हुए अब बसपा ने पूर्वांचल में अलग अलग समुदायों के लिए अलग रणनीति बनायीं है। हर बिरादरी के लिए 1-2 नेताओ को ज़िम्मेदारी दी गयी हैं। ऐसा पहली बार हो रहा हैं कि बसपा ने क्षेत्रीय क्षत्रपो को अधिकार के साथ साथ ज़िम्मेदारी भी दी हैं। इसको आप बसपा की नयी सोशल इंजीनियरिंग भी कह सकते हैं। ये नया प्रयोग बसपा के मौजूदा दलित-मुसलमान फोर्मुले के अलावा है। ज़्यादातर इसमें वो नेता लगाये गए हैं जो कभी समाजवादी का झंडा उठाये रहते थे। सपा से अलग होने के बाद बसपा अपने दोस्तों का खूब इस्तेमाल कर रही है।

एक नज़र डालते हैं बसपा के पूर्वांचल में नए समीकरण साधने वाले महारथियों पर

अम्बिका चौधरी

अम्बिका चौधरी सपा के पूर्व मंत्री रहे हैं और फेफना से चुनाव लड़ रहे हैं। वैसे वो पिछला चुनाव हार गए थे लेकिन फिर भी मंत्री बनाये गए थे। कभी मुलायम के करीबी थे लेकिन अखिलेश राज में किनारे लगा दिए गए। अब वो बसपा में हैं और नीला झंडा लेकर पूर्वांचल में यादवो को लामबंद कर रहे हैं। इनके ऊपर अति पिछड़े वर्ग को भी जोड़ने की ज़िम्मेदारी दी गयी हैं।

नारद राय

नारद राय भी सपा के पूर्व मंत्री हैं और मौजूद समय में बलिया से विधायक भी। इनका भी हाल कमोबेश अम्बिका चौधरी वाला ही हुआ और इन्होने बसपा ज्वाइन कर ली। चूँकि ये पूर्वांचल के प्रभावशाली भूमिहार नेता हैं इसीलिए अपने समुदाय में अब बसपा की पैठ बनाने के लिए लगे हुए हैं।

विजय मिश्र

अखिलेश सरकार में मंत्री रहे विजय मिश्र ने इस्तीफा देकर बसपा में शामिल हुए हैं। देर होने की वजह से अब चुनाव नहीं लड़ रहे। गाजीपुर से विधायक हैं और अब सतीश चन्द्र मिश्र के साथ ब्राह्मण में बसपा का प्रचार कर रहे हैं। पार्टी ने अब इनको ब्राह्मण फेस के रूप में प्रोजेक्ट किया हैं।

अंसारी बन्धु

इन्होने अपनी पार्टी कौमी एकता दल का विलय सपा में कर लिया। मौजूदा चुनाव में बाहुबली मुख़्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी और भाई अफजाल अंसारी घूम घूम कर सपा के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। मुख़्तार भी पैरोल पर बाहर आने की कोशिश में हैं। फिलहाल अंसारी बंधुओ का फोकस मुसलमानों को सपा से तोड़ कर बसपा की तरफ लाने में लगा हुआ हैं।

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