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फिल्म ‘मोदी का गाँव’ पर सेंसर बोर्ड ने जताई आपत्ति, नहीं मिली रिलीज़ करने की इजाजत

नई दिल्ली: देश-विदेश में सुर्ख़ियों में रहने वाले भारत के प्रधानमंत्री मोदी सेल्फी और कैमरा फ़्रीक माने जाते हैं। शायद आप इस बात से अंजान हो। लेकिन ‘मोदी के गाँव’ नाम की एक फिल्म रिलीज़ होने जा रही थी लेकिन सेंसर बोर्ड ने इसे हरी झंडी का इशारा नहीं दिया।

सेंसर बोर्ड का कहना है कि फिल्म को रिलीज़ करने से पहले फिल्म मेकर्स इलेक्शन कमीशन और पीएमओ का अनापत्ति नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेकर आये। इसपर आपत्ति जताते हुए फिल्म मेकर्स का कहना है कि क्या सेंसर बोर्ड बाकी फिल्मों को रिलीज़ पर भी चुनाव आयोग या पीएमओ से ऐसे सर्टिफिकेट लाने को कहता है।

अगर नहीं, तो इस फिल्म के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है। इस फिल्म के डायरेक्टर सुरेश झा हैं और फिल्म १० फरवरी को रिलीज़ होने जा रही थी। सुरेश झा का कहना है कि असल में ये फिल्म न तो मोदी जी की बायोपिक है और न ही इसेउनसे सीधे तौर पर जोड़ा गया है।

आपको बता दें की इस फिल्म में मोदी की भूमिका निभाने वाले इंसान का नाम विकास महांते है जोकि बिलकुल मोदी जैसे नजर आते हैं। सूत्रों का कहना है की सेंसर बोर्ड जानता है की देश में चुनावों का माहौल है और इस फिल्म के चलते किसी राजनीतिक दल को फायदा मिले।

फिल्म में दिखाए गए कंटेंट पर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जाता दी है जिससे फिल्म मुश्किलों में पड़ गई है। ऐसे में देखना होगा कि ये फिल्म कब तक रिलीज हो पाती हैं।

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