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हादसे में मारे गए 4 तीर्थयात्रियों की अर्थी को मुसलमानों ने दिया कांधा

पश्चिम बंगाल की सांप्रदायिक आग सुलग रही है लेकिन इन्हीं नफ़रतों के बीच मुल्क़ से ऐसी ख़बरें आती रहती हैं जो हमारा यक़ीन पुख़्ता करती हूं कि हिंदुस्तान की कौमी एकता को कोई नहीं खत्म कर सकता है । ऐसी ही ख़बर आई है ख़ित्ता-ए-वली (संतों की भूमि) की नाम से मशहूर मेरठ से । मेरठ मुज़फ़्फ़रनगर रास्ते पर स्थित क़स्बा खतौली के बाशिंदों ने हिन्दू मुस्लिम सद्भाव की तारीफ़-ए-क़ाबिल मिसाल क़ायम की है.

एक सड़क दुर्घटना में शाकुम्भरी देवी के दर्शन से लौट रहे चार तीर्थ-यात्रियों की मौत हो गई । जिसके बाद स्थानीय मुसलमानों ने हिन्दू समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इनकी अर्थी को कांधा दिया और अंतिम संस्कार में सहयोग की.

 

 

बुधवार को सहारनपुर के प्रसिद्ध तीर्थ शाकुम्भरी देवी के दर्शन कर लौट रहे प्रवीण पुत्र अशोक, अपनी मां व पिता और एक अन्य महिला सविता के साथ मुज़फ्फ़रनगर हाइवे पर गाड़ी से टकरा गए । घायलों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन किसी को भी बचाया नहीं जा सका ।
मुस्लिम बहुल इलाक़ा होने के कारण बड़ी संख्या में यहां मुसलमान पहुंच गए और इन सभी ने अंतिम संस्कार की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली. हिंदू समाज ने भी मुसलमानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनका सहयोग किया.

 

 

स्थानीय नागरिक क़ाज़ी फ़सीह अख्तर के मुताबिक़ मुसलमानों ने अपने फ़र्ज़ को निभाया है, जो इंसानियत के प्रति उनकी जवाबदेही तय करता है. उम्मीद है कि इससे नफ़रत फैलाने वालों को सबक़ मिलेगा.

राष्ट्रीय साहित्यकार और कवि व स्थानीय निवासी अजय जन्मेजय के अनुसार उनकी आंखें ख़ुशी से नम हो गई. यह नफ़रत की राजनीति करने वालों पर प्यार की थपकी है. देश को इसी प्रकार की सद्भावना की ज़रूरत है.

 

 

मुस्लिम बहुल आबादी वाला खतौली क़स्बा बेहद संवेदनशील इलाक़ा माना जाता है . लेकिन इस हादसे के बाद मुस्लिम समाज ने जो पहल की उससे हिंदू-मुस्लिम दोनों के रिश्तों में गर्माहाट आ रही है ।

एक तरफ़ जहां मातम का माहौल था, वहीं यह सब देखकर लोगों की ज़बान पर दुआएं भी थी. इस कार्य में विशेष तौर पर स्थानीय क़ाज़ी जमील अहमद, हाजी जावेद, इकराम अंसारी, हाजी फैज़ान, हाजी शहनवाज़ लालू, अरशद ज़ैदी, नईम, ताजुद्दीन, सोनू फ़रीदी समेत बड़ी संख्या में मुसलमान शामिल थे.

 

(फोटो साभार- टू सर्किल्स. नेट से)

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