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मुसलमान 6 महीनों को लिए बीफ़ खाना छोड़ दें, तो गिर जाएगी मोदी सरकार !

अपनी नाकामी से लोगों का ध्यान हटाने के लिए मोदी सरकार ने लव जिहाद, घर वापसी, बीफ पर प्रतिबंध और तीन तलाक़ जैसे मुद्दों को उठाया है। इन मुद्दों से विशेष रूप से मुसलमानों को लक्षित किया जा रहा है। यह साफ़ है कि आरएसएस भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है इसलिए मुसलमानों को योजनाबद्ध तरीके से लक्षित किया जा रहा है। हिंदुओं और मुस्लिम के बीच नफरत पैदा करने के लिए बीफ़ का मुद्दा उठाया गया है।

मुसलमान गौमांस खाते हैं और गाय हिंदुओं के लिए एक पवित्र जानवर है। लेकिन इसके विपरीत मुसलमान भारतीय जनसंख्या का सिर्फ 14 फीसदी हैं। ईसाइयों के अलावा दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों के लोग भी गौमांस खाते हैं। गौमां निर्यातकों में 99 फीसदी हिंदू हैं। यदि मुसलमान सिर्फ 6 महीने के लिए बीफ़ दूर हो जाते हैं तो इससे नतीजे में नरेन्द्र मोदी सरकार और देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित होगी।

मुसलमान अन्य विकल्प जैसे मांस, चिकन और मछली के लिए जा सकते हैं। क्या भेड़, मुर्गी पालन और मछली पालन के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं। महत्वपूर्ण रूप से गैर-मुस्लिम गौमांस निर्यातकों ने अपनी कंपनियों को अल-कबीर और अल-हम्द के रूप में नामित किया है ताकि भारतीय हिंदू और मुस्लिम देश भ्रमित रहें। भारतीय चमड़े का उद्योग 13 अरब डॉलर का है।

गाय, भैंस और बैल की हड्डियों को मिट्टी के बर्तनों और दवा बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि बीस उद्योग के साथ 22 लाख लोग जुड़े हुए हैं जबकि 40 लाख हड्डी और सींग प्रसंस्करण इकाइयों से जुड़े हैं; इनमें से अधिकतर हिंदू हैं।  भारत फुटवियर और चमड़े के वस्त्र उद्योग में दूसरा स्थान पर है।

यदि गौवध पर प्रतिबंध लगा दिया गया तो अनुमान के मुताबिक 30 अरब डॉलर (विनिमय मुद्रा) का नुकसान होगा, जबकि 60 से 70 लाख लोग बेरोजगार होंगे, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेग। किसानों पर सबसे खराब प्रभाव पड़ेगा। पिछले तीन सालों में हजारों किसानों ने आत्महत्या की है। वे स्वयं भूख से मर रहे हैं; इस स्थिति में वे बेकार गायों, बैल और भैंसों का क्या करेंगे?

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