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लेफ्टिनेंट उमर फयाज़ की पहली छुट्टी ज़िंदगी की आख़िरी छुट्टी साबित हुई

22 साल के लेफ्टिनेंट उमर फ़याज़ के लिए उनकी पहली छुट्टियां हीं ज़िंदगी की आखिरी छुट्टी बन गईं। जम्मू- कश्मीर के 2 राजपूताना रायफल्स में तैनात उमर फ़याज़ को आतंकियों ने शादी समारोह से अगवाकर बेरहमी से गोलियों से भून डाला । फयाज का गोलियों से छलनी शव दक्षिणी कश्मीर के हरमन में मिला था।

स्थानीय लोगों के मुताबिक नकाब पहने दो लोग मंगलवार रात करीब 8 बजे घर में घुसे । नकाबपोश लोगों ने फयाज को अपने साथ चलने के लिए कहा और उनके परिवारवालों को पुलिस को सूचना नहीं देने की चेतावनी दी। आतंकियं ने फयाज को नजदीक से सिर, पेट और सीने में गोली मारी हैं । फ़याज़ के क़त्ल के बाद से इलाके के लोगों में गुस्सा है, लोग हत्यारों की शिनाख्त कर कड़ी सज़ा दिए जाने की मांग कर रहे हैं।

6 माह पहले ही सेना मे लेफ्टिनेंट नियुक्त हुये उमर फ़याज़ को आतंकियों ने अपना निशाना बनाया है, आतंकियों की इस कायराना हरक़त से स्थानीय लोगों में काफ़ी गुस्सा है। लोग चाहते हैं कि उमर की शहादत ज़ाया ना जाए ।

फयाज ने नवोदय विद्यालय से पढ़ाई की थी । पुणे के राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) से पास आउट होने के बाद फयाज को 10 दिसंबर 2016 को सेना में कमीशन मिला था । वह 129वे बैच के कैडेट थे । फयाज 2 राजपूताना रायफल्स में तैनात थे और उन्होंने अपने कजन की शादी के लिए छुट्टी ली थी ।

फयाज़ को 25 मई को अखनूर क्षेत्र में मौजूद अपने यूनिट में वापस जाना था। लेकिन यह शादी उनकी जिंदगी की आखिरी शादी बन गई। सेना ने बयान जारी कर कहा कि वह वीर जवान को सलाम करती है और दुख की घड़ी में सेना उनके परिवार के साथ खड़ी है।

22 वर्षीय फयाज इस साल सेना के यंग ऑफिसर्स कोर्स के लिए जाने वाले थे । वह एनडीए में हॉकी टीम के कैप्टन थे और वॉलिबॉल के भी अच्छे खिलाड़ी थे । फयाज के पिता किसान हैं । फयाज़ के परिवार को अपने बेटे पर गर्व है।

दक्षिण कश्मीर में आतंक विरोधी अभियान के प्रमुख अधिकारी मेजर जनरल बीएस राजू ने अपने सभी यूनिट्स को इलाके में तलाशी अभियान का आदेश दिया है। रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने घटना की निंदा करते हुए इसे आतंकियों की कायराना हरकत करार दिया है।

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