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VIDEO: क्या आपको रोज़ा रखने के इन फ़ायदों के बारे में पता है?

जब हम रोजा रखते हैं तो उसका उदेद्शीय होता है गुनाहों से बचना और अपने रब को राज़ी करना। लेकिन अल्लाह ने जो भी आदेश दिए हैं, उसमें वास्तव में इन्सान और इन्सानियत की भलाई के बहुत से पहलु शामिल होते हैं। यही बात रोजे के आदेश पर भी साबित होता है।

रसूल अल्लाह (स.अ.) ने इरशाद फरमाया कि ‘ऐ मुसलमानों रोजा रखो स्वास्थ के लिए।’ आज मेडिकल साइंस की रिसर्च साबित करती है कि रोजा दरअसल इंसानी शरीर के हर सिस्टम का प्रोटेक्टर यानि कि सुरक्षागार्ड है। जिस्म का हर सिस्टम बेहतरीन तरीके से काम करता रहे इसके लिए रोजा पूरी तरह मददगार है।

सन्‌ 1994 में कसाबलांका में ‘रमजान व सेहत’ पर पहली इण्टरनेशनल कान्फ्रेंस हुई जिसमें पूरी दुनिया से आये पचास रिसर्च पेपर पढ़े गये। सभी में एक बात उभरकर आयी कि रोजे से किसी भी तरह का स्वास्थ से सबंधित कोई नुकसान नहीं होता। जबकि बहुत से हालात में रोजा पूरी तरह फायदेमन्द साबित होता है।

1. रोज़े के दौरान खाने पीने से परहेज़ इस सिस्टम को आराम देता है और हाज्मे का सिस्टम अपने को रिपेयर कर लेता है।

2. रोजा लीवर को हाज्मे के काम से कुछ घण्टों के लिए फ्री कर देता है, नतीजे में वह पूरी ताकत के साथ खून बनाने और इम्म्यून सिस्टम को मजबूत करने लगता है। इस तरह एक महीने का रोजा जिस्म में साल भर के लिए बीमारियों से लड़ने की ताकत पैदा कर देता है।

3. रोजा आमाशय में बनने वाले एसिड को बैलेंस करता है। नतीजे में इंसान न तो एसीडिटी का शिकार होता है और न ही कम एसीडिटी की वजह से बदहजमी होने पाती है।

4. रोजा रखने के दौरान रगों में खून की क्वांटिटी कम हो जाती है। जिससे दिल को कम काम करना पड़ता है और उसे फायदेमन्द आराम मिल जाता है। आज की भागदौड़ की जिंदगी में लोग हाईपरटेंशन का शिकार हो रहे हैं। रोजे के दौरान डायस्टोलिक प्रेशर की कमी उन्हें इस बीमारी से बचाकर रखती है।

3. रोजे से दिल का दौरा पड़ने का रिस्क खत्म हो जाती है।
4. इसी तरह गुर्दे जो खून की सफाई करते हैं, रोजे के दौरान आराम की हालत में होते हैं, इसलिए जिस्म के इस अहम हिस्से की ताकत लौट आती है।

5. नार्मल इंसान में रोजा डायबिटीज के रिस्क को कम कर देता है। क्योंकि रोजे के दौरान ब्लड में ग्लूकोज़ लेवेल बैलेंस हो जाता है और यह बैलेंस बाद में भी कायम रहता है।
6. रोजा फैट को तो कम करता है जबकि बाकी न्यूट्रिशन में कोई कमी नहीं होने पाती और वजन घटने के बावजूद शरीर स्वस्थ रहता है।
7. रोजा फूड एलर्जी, थकान और पेट की दूसरी बीमारियों में भी फायदा पहुंचाता है। पीठ दर्द और गर्दन दर्द में रोजे की हालत में आराम देखा गया है।

फास्टिंग का सबसे अच्छा तरीका है रोजा। ये बात मेडिकल रिसर्च से साबित है।

लिहाजा कुरआन आवाज दे रहा है, ‘‘अगर तुम सच को समझो तो तुम्हारे हक में यह बेहतर है कि रोजे रखो।’’ आज मेडिकल साइंस भी यही साबित कर रही है जो सदियों पहले इस्लाम ने इंसानियत की भलाई के लिए लागू कर दिया।
source: hamaraanjuman

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