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दलित और पिछड़ों का आरक्षण खत्म करना चाहती है मोदी सरकार- नीतीश कुमार

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि केंद्र में जिनके हाथ में शक्ति है, उनकी नजर आरक्षण खत्म करने पर है। इसलिए बीच-बीच में आरक्षण को लेकर कई तरह के बयान आते रहते हैं और टीका-टिप्पणी भी होती रहती है।

नीतीश कुमार ने कहा कि वे आरक्षण को खत्म करना चाहते हैं। उनसे सजग, सचेत रहने के साथ ही सामाजिक एकजुटता बनी रहनी चाहिए, ताकि दलितों, पिछड़ाें और आदिवासियों को जो शक्ति मिली है, उसे छीन न सकें। समाज को धर्म और संप्रदाय के नाम पर बांटने की कोशिश हो रही है। इससे हम सबको सचेत रहना होगा।

मुख्यमंत्री गुरुवार को रामलखन सिंह यादव की 97वें जयंती समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शराबबंदी से नया माहौल बना है। सामाजिक परिवर्तन हो रहा है। हमारी जो प्रतिबद्धताएं हैं, उन पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की प्रगति और सामाजिक उत्थान में रामलखन सिंह यादव के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।

उनका राज्य में बुनियादी ढांचा, सड़क-पुल के निर्माण के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में उनका उल्लेखनीय योगदान है। उनके नाम पर दर्जनों स्कूल-कॉलेज हैं। हमारी सरकार उनके कार्यों को आगे बढ़ा रही है। पांच घंटे से कम समय में राज्य के सुदूर गांवों से पटना पहुंचा जा सकेगा।

सीएम नीतीश ने कहा कि बिहार का विकास कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के बिना संभव नहीं है। महिलाओं को हर सेवा में 35% आरक्षण दिया जा रहा है। शिक्षा पर बजट की 20% राशि खर्च की जा रही है।

हर बच्चा ठीक से पढ़ सके, इस उद्देश्य से काम किया जा रहा है। लड़कियों की शिक्षा पर विशेष जोर है। 12वीं तक लड़कियों की शिक्षा के कारण राज्य में प्रजनन दर घट कर 1.6% हो गयी है, पर राष्ट्रीय स्तर पर यह 1.7% है।

सरकार युवाओं को उच्च शिक्षा की ओर आकृष्ट करना चाहती है। प्रदेश में ग्रॉस एनराॅलमेंट रेशियो 13% है, उसे सरकार 35-40% तक बढ़ाना चाहती है। इसके लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की गयी है। इसमें 12वीं के आगे पढ़ने के लिए चार लाख रुपये तक का लोन दिया जा रहा है।

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