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उर्दू इंकलाबी भाषा है, बिहार के हर स्कूल में पढ़ाई जाएगी: नीतीश कुमार

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य का हर स्कूली बच्चा उर्दू से वाकिफ हो। बच्चा उर्दू जाने, सीखे और समझने लगे यही मेरी ख्वाइश है। बच्चा जब उर्दू सीख जायेगा और समझने लगेगा तो उसकी भाषा में और सुधार होगा। साथ ही वह अपनी बातों को भी ठीक ढंग से कह पाएगा। सरकार उर्दू के विकास को बढ़ावा दे रही है।

मुख्यमंत्री दो दिवसीय जश्न-ए-उर्दू के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हर स्कूल में उर्दू पढ़ाई जाए, इसके लिए सरकार ने कोशिश भी की है। शिक्षकों की बहाली भी शुरू की गई, लेकिन अब किसके पास रोना रोएं।

उन्होंने कहा कि जितने स्वीकृत पद थे उतने आवेदन ही नहीं आए। हमारा उद्देश्य स्कूलों में बच्चों को उर्दू सिखाना था और हमें उर्दू पढ़ाने वाला चाहिए था, लेकिन लोग सिर्फ बहाली पर ध्यान देने लगे। मुझे तो अफसोस होता है कि बचपन में उर्दू पढ़ाने वाला नहीं मिला। बिहार का हर बच्चा उर्दू जानेगा, लेकिन इसमें थोड़ा समय लगेगा।

नीतीश कुमार ने कहा कि उर्दू इंकलाब की भाषा है। कोई भी परिवर्तन उर्दू के बिना मुमकिन नहीं। उर्दू को बढ़ावा मिलना चाहिए। यह मजहब से जुड़ी भाषा नहीं है। यह सभी हिंदू, मुसलिम, सिख की जुबान है। बिहार सरकार ने उर्दू में आवेदन लेने, जवाब देने, उर्दू में दस्तावेज का रजिस्ट्रेशन करने और विज्ञापन देने की प्रक्रिया शुरू की है।

करीब 400 उर्दू ट्रांसलेटर, उर्दू सहायक, पदाधिकारी की जिला, अनुमंडल व प्रखंडों में नियुक्ति के लिए पद स्वीकृत किये गये हैं। एेसा कर हम उर्दू पर कोई मेहरबानी नहीं कर रहे है। यह हमारी ड्यूटी है। काम करने का मौका दिया गया है तो हम अपने फर्ज को निभा रहे हैं।

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