Friday , August 18 2017
Home / India / NSG सदस्यता न देने का जवाब, भारत लागू नहीं करेगा पेरिस जलवायु संधि

NSG सदस्यता न देने का जवाब, भारत लागू नहीं करेगा पेरिस जलवायु संधि

नई दिल्ली : भारत तमाम कोशिशों के बावजूद चीन के विरोध के चलते एनएसजी में एंट्री नहीं पा सका। जुमा सुबह दक्षिण कोरिया के सोल में एनएसजी सदस्यों की मीटिंग में आए प्रस्ताव का चीन और उसके हिमायत देशों ने मुखालिफत कर भारत के इरादों पर पानी फेर दिया। 48 देशों की सदस्यता वाला एनएसजी कार्टेल भारत की सदस्यता पर बेतीजा ही खत्म हो गया। इससे खुंदक खाए भारत ने पेरिस जलवायु संधि के अमल को टालने का फैसला लिया है।

एनएसजी में एंट्री के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने भी आखिरी वक्त तक कोशिश करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग से ताशकंद में मुलाकात कर इस मसले पर हिमायत करने की दरख्वास्त किया था। लेकिन एनएसजी में एंट्री न होने पाने पर भारत ने अब पेरिस क्लाइमेट अग्रीमेंट को फिलहाल लागू न करने का फैसला लिया है।
इस अग्रीमेंट को बराक ओबामा के कार्यकाल की सबसे अहम उपलब्धि कहा जा रहा था। भारत की तरफ से जारी बयान में साफ तौर पर कहा गया है, ‘एनएसजी की तरफ से पॉजिटिव फैसले हमें पेरिस अग्रीमेंट पर आगे बढऩे को प्रेरित करता।’ पेरिस क्लाइमेट अग्रीमेंट को लागू न करने का भारत का फैसला ओबामा प्रशासन के लिए करारा झटका है। अमेरिका चाहता है कि भारत इस पैक्ट को लागू करे।

यह समझा जा सकता है कि एनएसजी की सदस्यता मिलने पर भारत पेरिस अग्रीमेंट पर आसानी से आगे बढ़ता। राजनयिकों ने बताया कि एनएसजी देशों की समग्र मीटिंग के दौरान 38 सदस्यों ने भारत को बिना शर्त समर्थन दिया, जबकि नौ देशों ने प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। हालांकि चीन आखिर तक भारत के विरोध की लाइन पर अड़ा रहा। उसके अलावा आयरलैंड, न्यू जीलैंड और ऑस्ट्रिया ने एनपीटी पर हस्ताक्षर न करने वाले देशों को एंट्री दिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। सूत्रों ने बताया कि स्विट्जरलैंड ने एनएसजी सदस्यता के नियमों पर सवाल जरूर खड़े किए, लेकिन भारत का समर्थन किया। चीन का सबसे करीबी साथी तुर्की रहा।
एनएसजी में भारत को सदस्यता न मिल पाने का असर चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ेगा। भारत की ओर से सार्वजिनक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है, लेकिन चीन ने अब खुले तौर पर भारत की वैश्विक संभावनाओं में अड़ंगा लगाना शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत उसने संयुक्त राष्ट्र में आतंकी मसूद अजहर पर बैन लगाए जाने का विरोध कर की थी।

TOPPOPULARRECENT