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पुलिस ने गुलज़ार को आतंक के झूठे आरोप में फंसाया, इसलिए मुआवजा दे सरकार: अदालत

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र और आतंकवाद के आरोप से बरी गुलजार अहमद वानी को बाराबंकी की एक अदालत ने मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को जेल में गुजरे वानी के वक्त के लिए उनकी शैक्षिक नुकसान के साथ औसत आमदनी को देखते हुए उन्हें मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा है कि वे मामले में जांच कर रहे अधिकारियों के लापरवाही का शिकार हुए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एम.ए. खान ने अपने फैसले में कहा कि अगर सरकार को लगे तो वह संबंधित पुलिस अधिकारियों से मुआवजा राशि हासिल कर सकती है। अदालत ने कहा कि अगर सरकार मुआवजा नहीं देती है, तो वानी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख करने का पूरा अधिकार है।

गौरतलब है कि एएमयू के छात्र गुलजार वानी को 30 जुलाई, 2001 को हिजबुल मुजाहिदीन का आतंकी होने के आरोप में दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। उस समय वानी एएमयू से अरबी में पीएचडी कर रहे थे। इसके बाद उन पर साबरमती एक्सप्रेस विस्फोट में साजिशकर्ता कहकर मुकदमा चलाया गया।

लेकिन पुलिस ऐसा कोई सबूत नहीं दे पाई, जिससे साबित हो कि वानी ने साल 2000 में हुए साबरमती ब्लास्ट की साजिश रची थी। बता दें कि साल 2000 में साबरमती एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट में नौ लोगों की मौत हो गई थी।

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