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भीड़ की हिंसा पर ओवैसी ने उठाया यह बड़ा कदम, लोकसभा स्पीकर को दिया नोटिस

एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी लोकसभा में मॉब लिंचिंग यानी भीड़ तंत्र के उत्पात की घटनाओं को लेकर प्राइवेट मेंबर बिल लाएंगे। ओवैसी ने लोकसभा स्पीकर को इस बाबत नोटिस भी दे दिया है।

इस बिल में ऐसी घटनाओं में लापरवाही बरतने वाले सरकारी अधिकारियों के खिलाफ 10 साल तक की सज़ा का भी प्रावधान है।

इसके साथ ही मामले के तुरंत निपटारे के लिए विशेष अदालतों का भी प्रावधान है। अब ओवैसी इसे पेश करने के लिए स्पीकर की तरफ से अनुमति की राह देख रहे हैं।

शुक्रवार को लोकसभा में लंच के बाद प्राइवेट मेंबर बिल पेश होते हैं। वैसे तो सियासी इतिहास में अब तक तीन बार ही प्राइवेट मेंबर बिल पास हो सके हैं, वो भी आखिरी बार 1971-72 में. ऐसे में इस बिल का सुर्खियां बटोरना तो तय है, लेकिन पास होना नामुमकिन जैसा है।

गौरतलब है कि देश में भीड़ के हाथों हत्या यानी मॉब लिंचिंग के मामलों में हुए इजाफे ने तमाम लोगों को परेशान कर रखा है। बीफ़ रखने का इल्ज़ाम लगाकर तमाम लोगों को पीटा गया है या उनकी हत्या तक कर दी गई है।

बुधवार को मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर राज्यसभा में बहस शुरू हुई थी. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने बहस की शुरुआत की. इस दौरान उन्होंने जुनैद का मुद्दा उठाया, वहीं दलित बुजुर्ग को मंदिर में ना जाने के मुद्दे को भी गुलाम नबी आजाद ने उठाया. आजाद ने कहा कि मैं इस मुद्दे पर सरकार को ही निशाना नहीं बना रहा हूं, कई मुद्दों में यह सामने नहीं आया है कि किस पार्टी का हाथ शामिल है. उन्होंने कहा कि झारखंड के अंदर मॉब लिंचिग के मुद्दे पर लगातार कई मामले सामने आए हैं. पिछले साल जानवर ले जा रहे दो व्यक्तियों को गौ रक्षकों ने मारा और पेड़ से लटका दिया.

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