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गाय घायल होने के बाद मालिक की रहस्यमयी मौत, सांप्रदायिक तनाव फैला

प्रतीकात्मक तस्वीर

भोपाल से लगभग 225 किलोमीटर दूर अशोकनगर जिले के सिलवान गांव में एक गाय के घायल होने के बाद सांप्रदायिक तनाव हो गया है।

ख़बर के मुताबिक, 27 अपैल को गाय का एक पैर घायल हो गया था और सोमवार की रात को उसके मालिक ने आत्महत्या कर ली। उनकी लाश भोपाल पशु चिकित्सालय में सीढ़ियों के पास फंदे से लटकी मिली थी। हालांकि परिजनों का कहना है कि उनकी हत्या की गई है।

मृतक घनश्याम लोधी के चचेरे भाई ने आरोप लगाया कि सात लोगों ने मिलकर उनकी हत्या की।

दरअसल, 27 अप्रैल को गाय का एक पैर घायल घायल हो गया था। गाय के मालिक घनश्याम लोधी और दूसरे हिंदू ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अख्तर खान नाम के एक व्यक्ति ने गाय को गोली मारी।

इसके बाद अख्तर खान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 429 (मवेशियों को मारने या अपंग करने) के तहत मामला दर्ज किया गया था। और उन्हें 28 अप्रैल को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया।

हालांकि स्थानीय पशुचिकित्सकों का कहना है कि गाय को चोट किसी भोथरा वस्तु से चोट लगी थी, न कि गोली से। इसके लिए स्थानीय जिला प्रशासन ने तीन विशेषज्ञों का जांच पैनल भी बनाया जिसने पाया कि पशुचिकित्सकों ने जो रिपोर्ट दिया है वो सही है।

लेकिन इसके बावजूद घनश्याम के रिश्तेदारों और अन्य गांववालों का कहना है कि अख्तर खान ने ही गाय की हत्या की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अख्तर खान कुछ कुत्तों को मार रहा था जो मुर्गियों पर हमला कर रहे थे।

रिश्तेदारों का दावा है कि उस दिन उन्होंने दो कुत्तों मारा था, लेकिन उनके साथ-साथ उसने गाय को भी गोरी मारी। उनका कहना है कि उनके पास कम-से-कम एक चश्मदीद गवाह है जिसने ये सब होते देखा था।

इसके बाद घनश्याम के 26 वर्षीय भतीजे सुनील ने आरोप लगाया कि खान के कुछ रिश्तेदार ने उनके चचा से मुलाकात की थी और उन्हें केस वापस लेने के लिए धमकी दी थी। अब रिश्तेदारों ने पुलिस में घनश्याम की आत्महत्या को हत्या बताते हुए अख्तर खान और उनके पांच रिश्तेदार समद खान, सलीम खान, भूरा खान, अब्दुल हसन और अबरार के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

सुनील का कहना है कि जिस पशु चिकित्सालय में गाय की इलाज चल रहा था, वहां छह अभियुक्तों ने रात में धावा बोला और उनके सिर पर बंदूक रख दिया। उसके अगले रोज की सुबह घनश्याम को अस्पताल के सिढ़ियों के पास फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया गया।

फिलहाल छह आरोपियों में से तीन- समद खान, सलीम खान और भूरा खान ने गुरुवार को आत्मसमर्पण कर दिया और जिसके बाद उन्हें हिरासत में भेज दिया गया।

इस घटना के बाद अब पूरे गांव में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया है। घनश्याम की पत्नी राधा ने आरोप लगाया, “मेरे पति आत्महत्या नहीं कर सकते। पुलिस पहले गाय को भोपाल ले गई और उन्हें साथ-साथ जाने के लिए मजबूर किया, और कहा कि वे उसे किसी भी खतरे से बचाएंगे। पहले गाय को गोली मार दी गई, और बाद में मेरे पति को अस्पताल में मार दिया गया। ”

राधा ने कहा, “वह गाय को जल्दी से जल्दी ठीक होते देखना चाहते थे और पैसा लेकर समझौता नहीं करना चाहते थे।” उन्होंने बताया कि उनके पति ने उन्हें फोन किया था और कहा था कि अगर कोई यहां भोपाल आ जाए तो वह गांव लौटना चाहते हैं।

वहीं दूसरी तरफ घनश्याम के भतीजे सुनील ने बताया, “मैं उस व्यक्ति की पहचान नहीं कर सकता जिसने बंदूक को मेरे सिर पर रखा था। मैं उस दिन बहुत डर गया था जब उन्होंने मेरे चाचा को मारने से पहले मुझे धमकी दी थी। मैंने उनको मारते नहीं देखा था। लेकिन वे ऐसा कर सकते थे क्योंकि वे चाहते थे कि मेरे चचा मामले को वापस ले लें।”

दूसरी तरफ मुसलमानों का कहना है कि सुनील को हिंदू संगठनों ने भड़काया और सिखाया है। अब्दुल हसन का कहना है, “हम एक सरकारी अस्पताल में किसी को कैसे मार देंगे और क्यों मारेंगे।  वैसे भी वहां सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। हमारे कॉल रिकॉर्ड्स साबित करेंगे कि हम उस दिन भोपाल में नहीं थे।

हालांकि खबरों के मुताबिक, अस्पताल में उस दिन सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे।

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