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मेवात: लगातार कर्ज़ में डूबते जा रहे हैं पहलू खान के घरवाले

अलवर में गौरक्षकों की पिटाई से हुई पहलू खान की मौत के एक महीने बाद पीड़ितों के घर वालों पर आर्थिक संकट आ गया है।

हालांकि पहलू खान के परिवार की कुछ संगठनों ने आर्थिक मदद की थी लेकिन इसी हमले में घायल होकर बिस्तर पर लेटे अजमत और रफीक के सामने घर चलाने और बढ़ते कर्ज का संकट पैदा हो गया है।

वह बताते हैं कि उन्होने 75,000 रुपये में तीन गायों को खरीदा था। हमलावरों ने मुझसे 35,000 रुपये छीन लिए।

अज़मत के भाई बताते हैं कि उन्होने लगभग 1.5 लाख रुपये उनके इलाज में खर्च किये हैं। मुझे उसे लेकर दिल्ली के एम्स में हर 3-4 दिन में जाना पड़ता है और एक बार में कम से कम 5000 रुपये का खर्च आता है। हमारी सारी बचत खत्म हो चुकी। हम कर्ज में हैं।

अजमत की मां बताती हैं कि घर में दूध का भी इंतज़ाम नहीं हो पा रहा है, जो भी थोड़ा बहुत कहीं से मिल जाता है उसे हम पतला करके अजमत के बच्चे (उनकी एक साल की बेटी) को देते हैं।

हालांकि डॉक्टर्स का कहना है कि अजमत के रीढ की चोट दो से तीन महीने में ठीक हो जाएगी।

एक अन्य पीड़ित रफीक भी बिस्तर पर हैं और उसकी एक नाक टूटी हुई है। वह जयपुर के पशु बाजार गया था लेकिन अपने बजट से ज्यादा उन्होने कुछ भी नहीं खरीदा था। उन्होंने बताया कि वह जो भी पैसा अपने साथ ले गए थे, उसे हमलावरों ने छीन लिया।

पहलू खान के आठ बच्चों में सबसे बड़े बेटे इरशाद (24) अभी डेयरी-खेती के काम को सही से नहीं जानते।

कब्रिस्तान से घर की ओर वापस जाते हुए पहलू खान के चाचा हुसैन पूछते हुए कहते हैं कहां से बचता पहलू? वह घटना के एक वीडियो का जिक्र करते हुए कहते हैं कि अगर आपने वीडियो देखा होगा तो नीली शर्ट पहने आदमी की मुठ्ठी में एक चाबी थी औऱ वह उससे उसके सिर पर हमला कर रहा था।

पहलू खान की 85 वर्षीय अंधी मां अंगूरी बेगम सुबह से ही रो रही हैं। दर्द भरी आवाज में बस यही कह रही है पहलू ने मुझे एक बार भी नहीं बताया कि वह जा रहा था।

पहलू खान के बयान के आधार पर पुलिस ने जिन छह लोगों का नाम एफआईआर में दर्ज किया है उनमें से किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस ने अन्य पीड़ितों के बयान दर्ज नहीं किए हैं।

 

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