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इंसानियत को झकझोर देती है पहलू खान की बूढ़ी हो चुकी अंधी मां के आंसु

नई दिल्ली: देश में जब भगवा आतंक अपने स्वरूप और नए अंदाज में प्रकट होता है तो इंसानियत कितनी शर्मसार होती है इसका अंदाज़ा तो बस वही लोग लगा सकते है जिन्होने खुद कष्ट को सहन किया हो अथवा जिनके परिजन भगवा ब्रिगेड के आतंक का शिकार हुए हों।
पहलू खान की मौत को तकरीबन 10 दिन होने को है लेकिन उनके घर में दोनों आखों से नबीना उनकी मां अंगूरी आज भी बेटे के हाथों से निवाला खाने का इंतज़ार कर रही है। उनको यकीन ही नहीं है कि उनका बेटा जो उनकी आंखों का नूर था वो अब इस दुनिया से जा चुका है और कभी भी लौट कर आने वाला नहीं है।
पहलू खान रमजान की तैयारी करने के लिए घर में दूधारू गाय लेने के लिए पशु हॉल पर गए थे उनके बेटे कहते हैं कि पहलू खान ने रमज़ान में दूधा की ज़रूरत के लिए गाय खरीद कर ला रहे थे। पहलू खान के दोनो बेटे आसिफ और इरशाद बहरोड की घटना को भूल नहीं पाते। वो कहते है उनके पिता और उनकी पिटाई के बाद गौरक्षक आतंकियों ने पेट्रोल लाने के लिए अपने आदिमियों को बाज़ार भेजा तब उनको जिन्दा बचने की आज खत्म हो चुकी थी क्योंकि गौरक्षक उनको जिन्दा जलाकर मारने के फिराक में थे। लेकिन तभी पुलिस आ गई उनकी जान बच गई।
पहलू खां अपने परिवार में सबके दुलारे थे चाचा, चाची, और ताई सभी उनको बहुत प्यार करते थे पहलू खान जब भी बाज़ार जाता तब अपने बच्चों और बूढ़ी मां के लिए खाने की चीज़ें ले आता था, लेकिन अब पहलू की 85 साला मां किस हाथ से निवाला खाएं उनका तो बेटा ही इस दुनिया से चला गया। अपनी दोनों आखों से नम अंगूरी बताती हैं पहलू खान बचपन से ही बहुत मेहनती था इसी वजह से घर में उसकी ज्यादा इज्जत थी लेकिन सिर्फ घर में दुधारू गाय लाने दौरान कथित गौरक्षको ने उनकी पीट पीट कर हत्या कर दी। हालांकि उनका ड्राईवर जो कि धर्म से हिन्दू था उसको गौरक्षको कुछ नहीं कहा।

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