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शेख चिल्ली का सपना बना पीएम मोदी का ई—बोट

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में मजदूर दिवस यानी पहली मई को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के अस्सी घाट पर देश की जिस पहली ई-बोट को लॉन्च किया था, गंगा से सटे गांवों में ई-बोट से रोजगार के नए साधन पैदा करने की उम्मीद भी जगी थी। पर्यावरण की रक्षा के साथ देश में डीजल की बचत के दिशा में उठाया गया यह कदम एक साल के भीतर भी साकार नहीं हो सका। प्रत्येक ई-बोट को लगभग 200 किलो वजन वाली छह बैटरी का एक सेट की आवश्यकता होती है, और नाविकों को अस्सी इलाके की गली में स्थित निकटतम सर्विस स्टेशन में ले जाने के लिए उन्हें खड़ी घाट सीढ़ियों तक ले जाना मुश्किल है। घाट पर चार्जिंग प्वाइंट के लिए दर्जनों बार महापौर रामगोपाल मोहले से मांग की गयी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई आजतक। एक दूसरे नाविक नवमी बाबू कहते हैं विदेशी पर्यटकों के बीच ई-बोट काफी लोकप्रिय है लेकिन चार्जिंग पॉवर प्वाइंट न होने से इसका मैनुअली चलाना भी बहुत मुश्किल है, इसलिए डीजल इंजन लगाकर कुछ लोगों ने मोटरबोट बना दिया। बनारस में देशी-विदेशी पर्यटकों के बीच गंगा में नौकायन का अलग क्रेज है। इसको देखते हुए 2000 से अधिक नाव संचालित होती है वहीं अवैध रूप से मोटरबोट भी चलती है। गंगा में कछुआ सेंचुरी के कारण सात किमी के दायरे में किसी भी मोटरबोट को संचालन का लाइसेंस नहीं दिया गया है। पर्यावरण की रक्षा के लिए पीएम की सौगात कब सही ढंग से गंगा की लहरों संग आगे बढ़ेगी, इसका इंतजार सबको है।

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