Friday , July 28 2017
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‘PM मोदी को मुस्लिम से पहले देवदासी के नाम वैश्या बनाई जा रही दलित लड़कियों के बारे में सोचना चाहिए’

हमारे देश में संस्कृति और रिवाज़ों के नाम पर आज भी कई कुप्रथाएं चल रही है। इन्ही में से एक है देवदासी प्रथा।

इस प्रथा की बलि कई दलित और आदिवासी लडकियां चढ़ चुकी हैं। आज भी करोड़ों गरीब दलित और आदिवासी परिवारों की बच्चियों को इसकी सजा भुगतनी पड़ रही है।

देवी को समर्पित करने के नाम पर ये बच्चियां देवदासी बना दी जाती है। आज भी कर्नाटक में लाखो देवदासी परिवार रह रहे हैं।

कहते हैं कि इस प्रथा में सुधार आया है लेकिन ये सुधर महज इतना है कि अब इन परिवारों की बच्चियों को मंदिरों में तो नहीं भेजा जाता। लेकिन उनको आज भी उनको ‘देवी’ को समर्पित कर वेशया बनने के लिए मजबूर किया जाता है।

इन बच्चियों के माँ-बाप ही इन्हे वेश्या बनने के लिए मजबूर करते हैं। क्योंकि इन बच्चियों की माताएं खुद भी देवदासी हैं और पिता ने उनकी माताओं से शादी नहीं की है।

इस प्रथा के खिलाफ कर्नाटक में कुछ हिम्मती देवदासी महिलाओं ने देवदासी महिलाओं की यूनियन बनाई है जिसमें माकपा ने उन्हें सहयोग दिया है। इस यूनियन में 15,000 से ज्यादा सदस्य हैं।

इन्ही के संघर्ष की बदौलत ही आज वेश्यावृति छोड़ चुकी देवदासी महिलाओं को पेंशन मिल पा रही है। हैरानी की बात है कि ये महिलायें माँ तो बन जाती हैं लेकिन इन्हे पत्नी का दर्जा कोई नहीं देता।

इनके बच्चों को हर जगह ‘मां का नाम ही भरना पड़ता है। जिसके लिए इनके बच्चों को काफी जिल्लत का सामना भी करना पड़ता है।

गौरतलब है कि देश की पीएम मोदी मुस्लिम महिलाओं को लेकर बहुत चिंता जाहिर करते हैं। लेकिन हिन्दू धर्म में आज भी देवदासी महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है और पेशे को छोड़ चुकी महिलाओं के लिए भी बेहतर बनाने के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठाती।

मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने की बात करते मोदी को एक नजर इनके ऊपर भी डालनी चाहिए ताकि इन्हे भी न्याय दिलाने के लिए उनका ध्यान जा सके।

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