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यहाँ के लोगों ने गाँव का नाम ‘पाक अधिकृत कश्मीर’ रखकर CM योगी से मांगी आज़ादी

पाक अधिकृत कश्मीर का ज़िक्र आते ही हिंदुस्तानियों का पारा चढ़ जाता है। जम्मू-कश्मीर का वो हिस्सा जिस पर पाकिस्तान ने कब्ज़ा कर रखा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे देश में भी एक पाक अधिकृत कश्मीर यानि की Pok है।

जम्मू-कश्मीर के पाक अधिकृत कश्मीर पर तो पाकिस्तान का कब्जा है, लेकिन इस पीओके पर भारत का कब्जा है। दरअसल, इस पीओके का नामकरण यहां के ग्रामीणों ने सरकार से नाराज होकर रखा है। वे कहते हैं, देश व प्रदेश के नेता सिर्फ चुनावों के वक्त आकर वादा करते हैं, इसके बाद वे कहां चले जाते हैं कोई नहीं जानता।

कानपुर जिले में स्थित घाटमपुर तहसील के सिम्मरनपुर गांव के लोग आजादी के बाद से गुलामों की तरह से जीवन यापन कर रहे हैं। इसी से नाराज गांववालों ने अपने गांव का नाम पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) रख दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी सड़क के उस पार के गांव में हर सुविधा मौजूद है। वहीं इस पार बिजली, सड़क, पेयजल और शिक्षा से हमें मोहताज रखा गया हैं। बहदाल गांव की दास्तां गांव वाले ने भाजपा विधायक अभिजीत सांगा को भी सुनाई, लेकिन उन्होंने कोई सुनवाई नहीं की।

इससे नाराज गांव वालों ने निर्णय लिया कि इस गांव का नाम पीओके रखकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आजादी दिलाए जाने की मांग की जाए। अब ग्रामीण अपने घरों व दुकानों पर पीओके का पोस्टर टांग कर सीएम योगी से आजादी की मांग कर रहे हैं।

भीतरगांव के सिम्मरनपुर गांव की दास्तां सुनने वाला कोई नहीं है। ग्राम प्रधान सड़क के उस पार तो आता है, लेकिन बदहाल गांव की तरफ देखता तक नहीं। इसी के चलते गांववालों ने शुक्रवार को कानपुर आ रहे यूपी के सीएम योंगी आदित्यनाथ के आने से पहले अपने गांव का नाम पीओके रख लिया।

गांव में 2008 में तत्कालीन बसपा सरकार के कार्यकाल के दौरान बिजली के पोल गढ़वाए थे, लेकिन 7 साल बीत जाने के बाद तार नहीं लगाए गए। पूर्व सपा विधायक मुनीन्द्र शुक्ला से कई बार बिजली की व्यवस्था कराए जाने की फरियाद की, लेकिन उन्होंने कभी सुधि नहीं ली।

दौलतपुर ग्राम पंयायत के आधीन आने वाले गांव सिम्मरनपुर में आजादी के बाद से बिजली के साथ ही पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के नाम पर सिम्मरनपुर में कुछ नहीं है, जिसके चलते 15 साल से यहां पर शहनाई की गूंज सुनाई नहीं पड़ी, जबकि दस कदम की दूरी पर बसे दौलतपुर में पेयजल के लिए सरकारी पानी की टंकी, हर घर पर बिजली, बेहतर सड़क और प्राथमिक स्कूल मौजूद हैं।

गांव के बृजेश यादव बताते हैं कि दो गांवों में विधायकों, सांसदों और ग्राम प्रधानों ने विकास कराया, लेकिन यादव और दलित बहूल्य गांव की तरफ किसी ने नहीं देखा।

बृजेश ने बताया कि 600 आबादी में महज 30 राशन कार्ड बने हैंए उनमें भी कोटेदार राशन नहीं देता। बरसात का मौसम आ गया है बिजली पहले से नहीं हैं, वहीं केरोसिन कई माह से नहीं मिल रहा। इसी के चलते हमने अब अपने गांव का नाम बदल दिया।

गांव के राजेश, कल्लू यादव, अमित यादव ने बताया कि जब सूबे में भाजपा सरकार बनी तो हम लोगों की आस जगी कि अंधेरे गांव में योगी जी उजाला लाएंगे। 15 साल से युवकों के अरमानों में बिजली पानी फेर रही थी। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा के चलते उनके सिर पर भी सेहरा बंधेगा। पर कुवांरों का विश्वास अब मंत्री पर नहीं रहा।

55 साल के अशोक ने बताया कि पिता जी चाहते थे कि मेरा भी घर बसे, पर ऐसा नहीं हो सका और वो इस दुनिया से चले गए। घर पर मां है, जिसे दिखता नहीं, हम भी उन्हें रोटी पकाकर दे रहे हैं। चलिए हमरे अरमान आंसुओं में धूल गए, लेकिन पचास से ज्यादा युवाओं के सिर पर शेहरा बंधे इसके लिए सीएम से हम मांग करते हैं कि गांव में बिजली पहुंचाएं।

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