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स्पेशल रिपोर्ट: प्रभु की लीला, अमूल दही 9720 रूपए प्रति किलो, एक लीटर पानी कीमत 1241 रूपए

शम्स तबरेज, सियासत ब्यूरो
नई दिल्ली: प्रभु की महिमा अपरम्पार होती है वह किसी भी असम्भव को संभव कर देता है। प्रभु की लीला मनुष्य की समझ से परे है। लेकिन अब उस प्रभु की बात करने जा रहे हैं जिनका नाम सुरेश प्रभु है ये भारतीय रेल के रेलमंत्री है और देश की सबसे बड़ी देशभ​क्त पार्टी के सांसद हैं।
गुजराती कंपनी अमूल पर प्रभु की असीम कृपा


प्रभु की रेल ने गुजराती कंपनी अमूल को मालामाल करने के चक्कर में 9720 रूपए प्रति किलों की दर से अमूल दही खरीदी। है न गज़ब इतनी महंगी दही मानों उसमें सोने की वरक लगी हो। प्रभु के सेन्ट्रल रेलवे कैटरिंग डिपार्टमेंट ने अमूल कंपनी पर इतनी कृपा दिखाई है कि 100 ग्राम अमूल दही जिसका अधिक्तम खुदरा मूल्य 25 रूपए है उसको 972 रूपए में खरीदा है।
भ्रष्टाचार के तमाम कीर्तिमान प्रभु की इस लीला के आगे पानी—पानी होते देखा जा सकता है। इतना ही नहीं पानी की एक लीटर की बोतल को 1241 रूपए प्रति लीटर के हिसाब से खरीदा गया है।
सूचना के अधिकार से रेलवे के घोटाले का खुलासा


जब इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत किया गया तो सबसे मुंह खुले रह गए। दरअसल एक आरटीआई कार्यकर्ता अजय बोस आरटीआई दाखिल करके ये इस जानकारी का खुलासा किया है। जिसके अनुसार सेंट्रल रेलवे कैटरिंग डिपार्टमेंट ने इन चीजों को उन पर लिखे एमआरपी से कई गुना ज्यादा दर पर खरीदा है।
अंग्रेजी अखबार ‘द हिन्दू’ ने इस खबर को विस्तार से छापा है। अजय बोस ने द हिंदू को बताया, ‘मैंने जुलाई 2016 में आवेदन दर्ज कराया लेकिन इसका कोई जवाब नहीं मिला। इससे पता चलता था कि वे कुछ छिपाना चाहते थे। मैंने एक अपील दायर कर दी और अपीलीय प्राधिकरण ने रेलवे को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया और 15 दिनों के अंदर विवरण प्रदान करने के लिए कहा। इसके बावजूद कई महीनों बाद भी कोई जवाब नहीं मिला।
आरटीआई से जवाब नहीं मिलने पर घोटाले का शक


अजय बोस को ऐसा लगा कि रेलवे जान बूझकर उनके अपील को नजरअंदाज कर रही है और तब उन्‍होंने दूसरी अपील दायर की। उन्‍होंने बताया, इस बार मुझे विवरण समेत इसका जवाब मिला जो चौंकाने वाला था। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार 100 ग्राम दही जिसकी कीमत 25 रुपये है, 972 रुपये में खरीदते हैं। इसके साथ ही रेलवे कई खाद्य सामग्री उसके MRP से कहीं अधिक मूल्‍य में खरीदती है। रेलवे कैटरिंग विभाग द्वारा खरीदे गए खाद्य सामग्रियों का वितरण जनआहार कैंटीन, रेलवे बेस किचन व डेक्‍कन क्‍वीन, कुर्ला-हजरत निजामुद्दीन एक्‍सप्रेस जैसे ट्रेनों में किया जाता है।
आरटीआई कार्यकर्ता अजय बोस का आरोप


अजय बोस ने आरोप लगाया है कि ऐसे घोटाले की वजह से ही रेलवे नुकसान में है। बोस ने द?’द हिन्दू’ अखबार को बताया, कि लंबे इंतजार के बाद मुझे यह चौंकाने वाला ब्‍यौरा मिला जो मात्र कुछ महीनों का ही था जबकि मैं पूरे साल की जानकारी चाहता था।
दही और पानी के अलावा और कहां बरसी रही प्रभु की कृपा


तूर दाल, मूंग दाल बेसन आदि के साथ टिश्‍यू पेपर भी इसमें शामिल हैं। इसके अलावा रेलवे द्वारा खरीदे गए खाद्य सामग्री में 2016 मार्च में 72,034 रुपये में 58 लीटर रिफाइन, एक लीटर रिफाइन 1,241 रुपये में खरीदा गया। इसके अलावा टाटा नमक के 150 पैकेट 2,670 रुपये जिसका प्रति पैकेट का मूल्‍य 15 रुपये की जगह 49 रुपये में खरीदा गया, वॉटर बोतल और सॉफ्ट ड्रिंक की एक बोतल 59 रुपये में खरीदी गयी।

बोस ने आगे बताया, रेलवे रिपोर्ट के अनुसार, जन आहार कैंटीन व स्‍टेशनों पर लगे स्‍टॉल नुकसान में चल रहे हैं लेकिन आरटीआई के जवाब से असलियत सामने आई है। बोस के अनुसार रेलवे ने चिकन, तूर दाल, मूंग दाल, बेसन और टिश्यू पेपर को भी बाजार भाव से काफी अधिक दर पर खरीदा. 570 किलो तूर दाल 89,610 रुपये (157 रुपये प्रति किलो), 650 किलो चिकन 1,51,586 (233 रुपये प्रति किलो), 148.5 किलो मूंग दाल 89610 रुपये (157 रुपये प्रति किलो) और 178 पानी-कोल्ड ड्रिंक्स के बॉक्स (एक बॉक्स में 10 बोतलें) 106031 रुपये (59 रुपये प्रति बोतल) की दर से खरीदे गए। सिर्फ समोसा, प्याज और आलू ही सही दर से खरीदे गए।

आरटीआई पर रेलवे की सफाई


सेंट्रल रेलवे के डिविजनल रेलवे मैनेजर रवींद्र गोयल ने कहा कि यह टाइपिंग एरर हो सकता है, लेकिन इस मामले की जांच की जाएगी।
केन्द्रीय विभागों और मंत्रालयों में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है इससे पहले भी 2जी स्पेक्ट्रम, कोयला घोटाला जैसे बड़े बड़े घोटाले हो चुके है लेकिन वो पिछली सरकार के कारनामें रहे हैं। फिलहाल भाजपा की मोदी सरकार स्वयं को स्वच्छ और ईमानदार कहती है, फिर भी ये घोटाला सामने आया है। अब रेलवे अधिकारी जांच की बात रहे हैं , प्रभु की रेल के इस भ्रष्टाचार की जांच ​कब तक संभव होगी, आने वाले समय में देखना होगा।

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