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रेप विक्टिम पर स्कूल छोड़ने का दवाब बन रहा मैनेजमेंट, कहा- बच्ची की वजह से बदनामी हो रही है

कोलकाता- बलात्कार के सैंकड़ों मामले सिर्फ़ इसलिए सामने नहीं आते हैं क्योंकि समाज का रवैया बेहद ख़राब होता है, बलात्कार पीड़ित को आरोपी मानकर समाज बहिष्कृत करता है. निर्भया के लिए पूरा देश खड़ा हो गया है उसके दोषियों को सज़ा-ए-मौत मिल गई है. लेकिन वहीं दूसरी तरफ़ कोलकाता मे एक बलात्कार पीड़ित लड़की को सभ्य समाज जीने नहीं दे रहा है.

कोलकाता में 12 साल की रेप पीड़िता के साथ स्कूल प्रशासन ने मानवता को शर्मसार करने वाला व्यवहार किया है। बच्ची के परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने उनकी बच्ची को मानसिक प्रताड़ना दी है। स्कूल की हेडमिस्ट्रेस ने न केवल बच्ची को बेइज्जत किया बल्कि स्कूल को बदनाम करने का आरोप भी उस पर लगाया है और स्कूल छोड़ने का दबाव भी बच्ची पर बनाया।

रेप पीड़िता ने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया है, उसे स्कूल स्टाफ के व्यवहार से परेशान होकर ट्रांसफर सर्टिफिकेट लेना पड़ा है । वहीं, बच्ची संभवत: पश्चिम बंगाल की सबसे कम उम्र की मां है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबरों के अनुसार स्कूल की हेड मिस्ट्रेस ने कहा कि बच्ची के साथ हमारी, पूरे स्कूल स्टाफ और अन्य अभिभावकों की सहानुभूति है । मगर उन्होंने कहा कि बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि रेप पीड़ित बच्ची के साथ पढ़ने वाली दूसरे बच्चे डरे-सहमे रहते हैं। वो लोग नहीं चाहते कि उनके बच्चे पीड़ित बच्ची के साथ पढ़े।

हेड मिस्ट्रेज ने यह भी बताया कि स्कूल के शिक्षक भी इस बात से डरे हुए हैं कि कहीं किसी दिन उनके खिलाफ भी यौन शोषण का आरोप न लग जाए । हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि उनका स्कूल सातवीं तक ही है और आज नहीं तो 6 महीने बाद बच्ची को स्कूल छोड़ना ही पड़ेगा। इसलिए बच्ची को अभी ही स्कूल छोड़ने की सलाह दी गई।

स्कूल के रवैये से नाराज बच्ची के दादा ने तुरंत ट्रांसफर सर्टिफिकेट ले लिया। उनका कहना है कि हमारी बच्ची आखिर कब तक बेइज्जती झेलती रहेगी। उन्होंने बताया कि रेपिस्ट तो गिरफ्तार हो गया है मगर अभी भी पांच आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस उनको पकड़ने की कोशिश नहीं करती है। उन्होंने कहा कि वो आखिरी सांस तक उन सबके खिलाफ लड़ेंगे। पीड़ित परिवार कहते हैं कि स्कूल में बच्ची से भद्दी-भद्दी बातें पूछी जाती थीं और उसे उल्टा-सीधा कहा जाता था।

पीड़ित बच्ची के पिता अब उसे घर से करीब 15 किलोमीटर दूर एक स्कूल में दाखिला कराने की कोशिश में हैं। इसके लिए राज्य के जल संसाधन मंत्री से स्कूल प्रशासन को एक सिफारिश पत्र भी लिखवाया है। इस बीच परिवार बच्चे के डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है ताकि उसके पिता की पहचान की जा सके। बच्ची ने 8 मार्च को एक बच्चे को जन्म दिया था।

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