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IT सेल ने लाखों जीबी डेटा मुझे गाली देने में ख़र्च किया, सीने में जिगर रखता हूँ, कुछ बात तो है मुझमे: रवीश कुमार

मैं पत्रकार हूँ। अख़बार नहीं हूँ कि भारत की सारी ख़बरों को अपने देह पर छाप आपके घर आ जाऊँगा। सारी ख़बरों को करने और उन पर लिखने लगा तो मैं तीन चार सौ साल बाद भी घर न लौट सकूँ। जब बैंक, टेलीकाम सेक्टर पर लिखता हूँ या अपनी पसंद के किसी विषय पर तब बिना पढ़े कुछ भी बकने की योग्यता रखने वाले आ जाते हैं। आप टेलिकॉम और फ़सल बीमा की पोल खोल रहे हैं मगर केरल पर चुप हैं। अब केरल पर कर दिया तो कहने लगे कि बंगाल पर चुप हैं। बंगाल पर कर दिया तो कहने लगे कि असम में जो हिंसा हुई थी उस पर क्यों नहीं बोले। हम कोई राजनीतिक दल हैं कि रोज़ प्रेस कांफ्रेंस करेंगे । टीवी में प्रवक्ता भेजेंगे !

अगर आप चाहते हैं कि मैं हर विषय पर बोलूँ तो दस हज़ार का महीने का सब्सक्रिप्शन ले लीजिये। फिर जो डिमांड करेंगे लिख दूँगा। जो लिखता हूँ वो दिखता ही नहीं। उस पर तर्क या
सवाल नहीं करेंगे। उनके इस तरह के डिमांड से ये तो तय है कि भारत में दो ही लोगों का विकल्प नहीं है। एक प्रधानमंत्री मोदी का और दूसरा रवीश कुमार का ।

कैसी भद्दी और कुतर्की भाषा लिखते हैं ये सब। हर बात को इसके विरोध में तो उसके विरोध में घोषित करते रहना है। हद है। थाना पुलिस से तो मुख्यमंत्री मंत्री डर जाता है। उससे डरा दिया तो क्या तीर मार लिया। सुना है जज साहब को भी साहब से डर लगता है। तो हमको डरा भी दोगे तो ये मेरी हार कैसे हुई। उनकी हार है जो मुझे देखते हैं। पढ़ते हैं। वो हारेंगे। मैं नहीं। वो हारेंगे जो रोज़ देश के अलग अलग हिस्से से लिखते हैं कि रवीश जी सरकार हमारी नहीं सुन रही है, आप दिखा दीजिये। मुद्दा उठा दीजिए । वो हारेंगे जो रोज़ मिलने आते हैं कि हमारी कोई नहीं सुन रहा। उन हारे हुए की एक और हार होगी। मैं सत्ता से हार कर विजयी रहूंगा। याद रखना गाली देने वालों ।

तुम्हारे अनुसार अगर भारत के तमाम मुद्दे तब तक अधूरे हैं जब तक रवीश कुमार नहीं लिखेगा । यही मेरा होना है। एक दिन मिटना तो सबको है। मैं अपनी नियति जानता हूँ तब भी सीने में जिगर रखता हूँ । जब तक हूँ तब तक तो तुम पूछोगे ही कि इस पर तो लिख दिया
बताओ उस पर कब लिखोगे।

मुझे पता है आई टी सेल का मुखिया जो नेता के नाम के बग़ैर अपना चेहरा समाज में नहीं दिखा सकता, उसके आदेश पर लिखा जा रहा है। जो मैं लिख सकता हूँ वो लिखूँगा । जो लिखता हूँ, बात उस पर हो। तीन साल से लाखों जीबी डेटा मुझे गाली देने में ख़र्च कर लिया । एक निरीह पत्रकार के पीछे इतनी ताकत लगी है, तो उसमें कुछ बात तो है। ऐश करो दोस्तों । ये लो मैं डर गया । चलो ख़ुश हो जाओ। खीर पूड़ी खाओ। केरल वाला शो का लिंक दे रहा हूँ देख लेना।

 

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