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रवीश कुमार: मैं JNU में टैंक लगाने का विरोध नहीं करता अगर…..

मैं JNU में टैंक लगाने का विरोध नहीं करता अगर…..

सारे बड़े और अच्छे फैसले जे एन यू के अलावा बाकी स्कूल कालेजों के लिए भी होते।

क्या राष्ट्रवाद की ज़रूरत अकेले JNU को है ?

सिर्फ JNU में टैंक लगाने से राष्ट्रवाद के विकास में भयंकर असमानता और असंतुलन पैदा हो सकता है।

2014 के आँकड़े के अनुसार भारत में 667 विश्वविद्यालय हैं। 37,204 कालेज हैं और 11,443 संस्थाएँ।

इनका कुल योग हुआ 49,314

मतलब हमें हायर एजुकेश सेंटर के परिसर के लिए 49,314 टैंक चाहिए।

हर कालेज में टैंक लगाने को लेकर हड़ताल हो।

जे एन यू से पहले जहाँ और भी है.. नारा लगे।

9 August 2016 की टाइम्स आफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार देश में एक लाख से अधिक सरकारी स्कूलों में एक ही टीचर है। यहाँ दूसरा टीचर आने से रहा। बच्चे बाग़ी हो सकते हैं । इसलिए टैंक की ज़रूरत सबसे पहले यहाँ है।

कालेजों में शिक्षकों के हज़ारों पद ख़ाली हैं तो ख़ाली रहें । इस पैसे से सबसे पहले टैंक आए।

सी बी एस ई से जुड़े 20,000 प्राइवेट स्कूल हैं । अंग्रेज़ी शिक्षा वाले तो और भी औपनिवेशिक होते हैं । इन सभी स्कूलों के लिए टैंक लगाना अनिवार्य हो। माँ बाप से चंदा लिया जाए।

इस तरह भारत को तत्काल एक लाख सत्तर हज़ार टैंक की आवश्यकता है।

बिजनेस इनसाइडर के अनुसार सबसे अधिक टैंक रूस के पास है। मात्र 15,500 ।

गूगल से पता चला कि एक टैंक की कीमत 8 से 9 million dollar है। अगर 65 के रेट से ठीक हिसाब लगाया है तो एक टैंक ती कीमत हुई करीब 58 करोड़।

गूगल से सेकैंड हैंड टैंक का रेट नहीं मालूम चल सका है।

वैसे भी मामला राष्ट्रवाद का है इसलिए टैंक नया ही हो। सेकेंड हैंड टैंक से राष्ट्रवाद का आधा ही विकास होगा।

क्या कोई 1,70,000 को 59 करोड़ से गुना करके बता सकता है कितना हुआ ?

राष्ट्रवाद जगाने के लिए देरी नहीं होनी चाहिए। कल ही टेंडर निकल जाना चाहिए।

टैंक ऑन । मार्च ऑन । जल्दी करें । देर न करें ।

राष्ट्रवाद पर सबका हक। मेरा कालेज हो टैंक का घर ।

 

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