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RBI ने तीसरे साल भी रेपो रेट 6.25% पर रखा बरकरार

नई दिल्ली:  रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने गुरुवार को नए कारोबारी साल की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा पेश की। बैंक में इस साल का रेपो रेट 6.25% पर बरकरार रखा है। बैंक ने इसे पहले की तरह की रखा है।

बता दें कि यह लगातार तीसरी बार है जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लेंडिंग रेट में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया है।  हालांकि रिवर्स रेपो रेट को बढ़ाकर 6 फीसदी कर दिया गया है।

गौरतलब है कि विश्लेषकों ने इसको लेकर पहले ही कहा था कि इस बार भी रेपो रेट में कमी नहीं की जाएगी। दो दिन चलने वाली समिति की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक बुधवार से शुरू हो गई थी। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने 8 फरवरी को पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर को 6.25 फीसदी रखने का फैसला किया था।

उल्लेखनीय है कि बैंकों को अपने प्रतिदिन के कामकाज लिए अक्सर बड़ी रकम की जरूरत होती है। तब केंद्रीय रिजर्व बैंक से रात भर के लिए (ओवरनाइट) कर्ज लेने का विकल्प अपनाते हैं। इस कर्ज पर रिजर्व बैंक को उन्हें जो ब्याज देना पड़ता है, उसे रेपो रेट कहा जाता है। इसका आम आदमी पर काफी असर पड़ता है।

दरअसल, रेपो रेट कम होने से बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना सस्ता हो जाता है और इसके चलते बैंक आम लोगों को दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दरों में भी कमी करते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा रकम कर्ज के तौर पर दी जा सके। अगर रेपो दर में बढ़ोतरी की जाती है तो इसका सीधा असर यह होता है कि बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से रात भर के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। ऐसे में जाहिर है कि बैंक दूसरों को कर्ज देने के लिए जो ब्याज दर तय करेंगे वह भी उन्हें बढ़ाना होगा।

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