Friday , October 20 2017
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दांव पर लगे हैं अरबों, रोहिंग्या को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं बनने देना चाहता चीन

भारत की तरह चीन भी रोहिंग्या के मुद्दे पर म्यांमार को समर्थन दे रहा है साथ ही वह नहीं चाहता कि यह वैश्विक मुद्दा बने। हालांकि इसके पीछे उसका अपना व्यापारिक हित है। टाइम्स ऑफ इंडिया के खबर के मुताबिक हिंसाग्रस्त रखाइन प्रांत में चीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और सहित अन्य प्रॉजेक्ट्स में 7.3 अरब डॉलर के निवेश में जुटा है।

वही इस मामले में सिंगापुर के राजारथनम स्कूल ऑफ इंटरनैशनल स्टडीज (RSIS) में चाइना प्रोग्राम के असोसिएट रिसर्च फेलो आइरिनी चेन ने कहा, ‘चीन रखाइन के डीप सी पोर्ट में 7.3 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है। उसका प्लान इस क्षेत्र में एक इंडस्ट्रियल पार्क और स्पेशल इकनॉमिक जोन विकसित करने का भी है।’

रॉयटर्स ने रिपोर्ट दी थी कि चीन के आधिकारिक डॉक्युमेंट्स से पता चलता है कि चीन के CITIC कॉर्पोरेशन की अगुआई वाला संघ डीप सी पोर्ट में 70 से 85% शेयर चाहता है, जोकि उसके वन बेल्ट वन रोड (OBOR) परियोजना को आगे बढ़ाएगा और उसे बंगाल की खाड़ी से जोड़ देगा। यह मुख्य वजह है कि चीन रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ म्यांमार सरकार की कार्रवाई को समर्थन दे रहा है।

वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर इंटरनैशनल स्टडीज ऐंड स्ट्रैटिजिक साउथ ईस्ट एशिया प्रोग्राम के डेप्युटी डायरेक्टर मरी हीबर्ट कहते हैं कि चीन म्यांमार और संयुक्त राष्ट्र को यह बता रहा है कि वह म्यामांर को उसकी संप्रभुता की रक्षा का समर्थन दे रहा है। इसके अलावा चीन सक्रियता के साथ उन देशों के ऐसे प्रयासों को रोकेगा जो सिक्यॉरिटी काउंसिल द्वारा रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ ऐक्शन रोकने के लिए म्यामांर पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे।

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