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प्रज्ञा ठाकुर को ज़मानत मिलने पर मैं बिल्कुल भी हैरान नहीं, मोदी सरकार में ये होना ही था: रोहिणी साल्यान

मालेगांव धमाके में एनआईए की पूर्व विशेष अभियोजक रोहिणी साल्यान साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की ज़मानत पर हैरान नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि जब धमाके की जांच एजेंसी एनआईए ख़ुद कह रही है कि साध्वी को ज़मानत देने में उसे कोई आपत्ति नहीं है तो फिर हमे हैरानी क्यों होनी चाहिए। इस केस में यही होने की उम्मीद थी।

रोहिणी साल्यान वही वकील हैं जिन्होंने मालेगांव धमाके में जांच एजेंसी एनआईए की भूमिका पर सवाल उठाए थे।

2015 में रोहिणी ने इंडियन एक्सप्रेस अख़बार से कहा था कि 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद एक एनआईए अफसर ने उनसे संपर्क कर कहा था कि वह आरोपियों के प्रति नरम रुख़ अपनाएं।

जांच एजेंसी एनआईए पर लगाए गए उनके इस गंभीर आरोप के बाद काफी हंगामा हुआ था। यहां तक कि रोहिणी को एनआईए के विशेष अभियोजक के पैनल से हटा दिया गया था। इसके बाद रोहिणी साल्यान ने उस एनआईए अफ़सर के नाम का खुलासा भी किया था जिसने उनसे आरोपियों के प्रति नरमी बरतने के लिए कहा था।

प्रज्ञा सिंह ठाकुर को ज़मानत मिलने के बाद इंडियन एक्सप्रेस से उन्होंने कहा, ‘मैं अब इस केस का हिस्सा नहीं हूं, लिहाज़ा मैं बहुत कुछ नहीं कहना चाहूंगी। जब मैंने ख़ुद को इस केस से अलग कर लिया तो आगे बढ़ गई। अब मैं इसके बारे में नहीं सोचती।’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं एक भारतीय और हिंदू हूं और कर्मा में विश्वास करती हूं। मेरा विश्वास है कि न्याय के देवता शनि शनेश्वर इंसाफ़ करेंगे और जो जिसने जो किया है, उसे उसका फल देंगे।’

सभी हिंदुओं पर से ऐसे केस हटाए जाएं।

वहीं विश्व हिंदू परिषण के प्रवीण तोगड़िया ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को ज़मानत दिए जाने पर हाई कोर्ट का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार को अन्य हिंदू कार्यकर्ताओं पर से ऐसे सभी मामले हटाने चाहिए।

तोगड़िया ने कहा, ‘एक मामले में ज़मानत का दिखावा करने की बजाय केंद्र सरकार को हिंदुओं की भावनाओं का ख़्याल रखते हुए उन सभी लोगों को रिहा करना चाहिए जिनपर राजनीतिक कारणों से ऐसे मामले दर्ज किए गए और अब ट्रायल चल रहा है।’

 

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