Wednesday , September 20 2017
Home / Featured News / RSS की सच्चाई RSS की ज़बानी, एक किताब जिसने तहलका मचा दिया

RSS की सच्चाई RSS की ज़बानी, एक किताब जिसने तहलका मचा दिया


image

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दावा करता है कि वह इस देश का सबसे बड़ा रखवाला, सबसे बड़ा राष्ट्रभक्त और सबसे बड़ा वफ़ादार है! वह और उसके सहयोगी संगठन तथा व्यक्ति लगातार इस प्रचार में लगे हैं कि आरएसएस और देशभक्ति एक दूसरे के पर्याय हैं।
इस देश में कौन वफ़ादार है और कौन नहीं, इसका प्रमाण पत्र देने का ठेका भी आरएसएस ने अपने सर ले रखा है। जबकि आरएसएस एक ऐसा संगठन है जो न तो स्वतंत्र भारत के संविधान, राष्ट्र-ध्वज (तिरंगा) और प्रजातांत्रिक-धर्मनिर्पेक्ष जैसी राष्ट्रीय मान्यताओं में विश्वास करता है और न ही भारत के स्वतंत्रता संग्राम से इसका कोई लेना देना था। आरएसएस स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपने प्राण निछावर करने वाले शहीदों को कितनी हीन दृष्टि से देखता था यह जान कर किसी भी देशवासी को ग़ुस्सा आना लाज़मी है।
आरएसएस दलितों और महिलाओं के बारे में जो शर्मनाक और अमानवीय दृष्टिकोण रखता है उससे संबंधित तथ्य भी इस पुस्तिका में उपलब्ध कराये गये हैं। आरएसएस के अपने दस्तावेज़ों के माध्यम से उसके असली चेहरे को पाठकों के सामने पेश करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका से संबंधित सच्चाईयों को जानने की भी कोशिश की गई है। आरएसएस के दस्तावेज़ों मंे मौजूद सच्चाइयां यक़ीनन उन लोगों को बहुत निराशा करेंगी जो अभी तक यह मानते रहे हैं कि आरएसएस अंग्रेज़ों के उपनिवेशिक शासन से भारत की मुक्ति चाहता था या वह स्वतंत्र भारत के जनतांत्रिक संविधानिक ढांचे के प्रति वफ़ादार है। इस संगठन के विभिन्न प्रकाशन यह सिद्ध करते हैं कि आरएसएस इस देश के लिए एक बड़ा ख़तरा है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। ख़ास तौर पर ऐसी सथिति में जबकि देश में सन् 1998 से 2004 तक रहे प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गृहमंत्री, लाल कृष्ण आडवानी ने यह बताया हो कि आरएसएस की हैसियत उनके लिए वही है जो जवाहर लाल नेहरू के लिए गांधी जी की थी। इस तरह हमारे जनतांत्रिक और धर्म निरपेक्ष देश के सामने कितने गम्भीर ख़तरे हैं, इसका अनुमान लगाना ज़रा भी मुश्किल काम नहीं है।
अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी ने बार-बार खुद को आरएसएस का ‘स्वयंसेवक’ घोषित किया। 2014 में सत्तासीन हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उनके मंत्रीमंडल के कई सदस्सय और राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री स्वयं को आरएसएस का सदस्सय बता रहे हैं। लाल कृष्ण आडवाणी ने तो आरएसएस को भाजपा के लिए ‘नाभी नाल’ की संज्ञा दी। उनका स्पष्ट तात्पर्य था कि आरएसएस उनके लिए वह सब ख़ुराक उपलब्ध कराता है जो एक मां अपने पेट में पल रहे बच्चे को जि़ंदा रहने के लिए ‘नाभी नाल’ द्वारा पहुंचाती है। आरएसएस अब ‘गै़र राजनैतिक’ संगठन न रहकर अपने असली रंग में मुस्लिम लीग के पद चिन्हों पर चल रहा है। यह इस देश को धार्मिक राष्ट्र में परिवर्तित करने के काम में जुटा है। अगर देशवासी इस भीतरघात के प्रति समय रहते सचेत न हुए तो इस देश को विनाश से कोई नहीं बचा पाएगा।
हमें अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान की विनाश लीला से सबक़ सीखना ज़रूरी है। सन् 1947 में पाकिस्तान ने एक धार्मिक राष्ट्र बनने का निर्णय लिया था। धार्मिक राष्ट्र पाकिस्तान में जो कुछ हुआ और हो रहा है वह सब हमारे देश के लिए भी एक चेतावनी है। आरएसएस हमारे देश को उसी पथ पर ले जाना चाहता है जिस पर चल कर पिछले 65 सालों में पाकिस्तान विनाश के कागार पर पहुँच गया है। हमें हर हालत में अपने प्यारे देश को आरएसएस की इस विनाश-यात्रा की योजना से बचाना होगा।

इस किताब को आप Amazon पर खरीद सकते हैं


Buy on Amazon

ISBN-10: 81-7221-068-X
ISBN-13: 978-81-7221-068-7

प्रकाशक
Pharos Media & Publishing Pvt Ltd
D-84 Abul Fazl Enclave – I
Jamia Nagar,
New Delhi-110025, India
Tel. 011-26947483, 011-26952825
www.pharosmedia.com
http://www.pharosmedia.com/books.htm

TOPPOPULARRECENT