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जो खुद की पत्नी को सम्मान नहीं दे सका, वो तीन तलाक़ और मुस्लिम औरतों पर न बोले: सलमान खुर्शीद

इंदौर। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने शनिवार को इंदौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति खुद की पत्नी को सम्मान नहीं दे सका वो तीन तलाक के मुद्दे पर कैसे बोल सकता है।

बातों-बातों में खुर्शीद ने खुद की पार्टी के नेताओं को भी सीख दे डाली। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को कम्युनिकेशन स्किल सुधारने की जरूरत हैं।

प्रधानमंत्री पर टिप्पणी करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा की उन्होंने आज तक देश में एक भी समस्या नहीं सुलझाई है। उनके पास जादुई छड़ी है, जिसे घुमाकर समस्या सुलझ गई, बोल देते हैं।

सलमान खुर्शीद ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर तो मोदी की यह जादुई छड़ी भी काम नहीं कर रही। भाजपा छाती पीटती है कि पीओके हमारा है। जब वहां सर्जिकल स्ट्राइक के लिए सेना को भेजा था तो वापस क्यों बुलाया?

निजी कार्यक्रम में आए खुर्शीद ने कहा कि राजनीति में फेरबदल तो होते रहते हैं। आज के दौर में सबसे अहम है कहानी कहने की कला। कांग्रेस को फेरबदल की नहीं, बल्कि कला को सीखने की जरूरत है।

  • Ajaz Ahmad

    तीन तलाक़ औरतों के लिए नहीं मर्दों के लिए एक सजा
    शायद आप तीन तलाक के वास्तविक तथ्यों को नहीं जानते अरब में ये रिवाज था की अगर मर्द औरत में किसी वजह से नहीं बनती थी तो वो औरत को एक तलाक देता था और अगर मर्द को ये एहसास होता की उसने गलती की है तो वो ये कहकर की मैं अपना तलाक वापस लेता हूँ बिना किसी समस्या के वापस हो जाता था मगर यदि वो ऐसा नहीं करता था तो फिर उसे औरत के तीन मासिकधर्म बीत जाने का इन्तिज़ार करना पड़ता था और उसके बाद ही वो दूसरी बार तलाक दे सकता था और फिर वो अपनी मर्जी से तलाक वापस नहीं ले सकता था और न ही औरत के साथ रह सकता था और उसके बाद फिर से औरत के तीन मासिकधर्म बीत जाने पर तीसरा तलाक देता था मगर औरत को चिढ़ाने और मानसिक प्रतारणा देने के लिए कुछ लोग हर तीन माह पर तलाक देकर उसे वापस ले लेते थे फिर चिढ़ाने के लिए तीन माह बाद तलाक दे देते थे और मानसिक प्रतारणा का ये क्रम निरंतर चलता रहता था इसे रोकने और औरत को सुरक्षा देने के लिए कुरआन पाक में आया की आप किसी औरत को तीन बार से ज्यादा तलाक नहीं दे सकते और अगर तीन बार तलाक दे दिया फिर हलाला करना पड़ेगा और हलाला मर्द के लिए सबसे बड़ी सजा है हलाला यानि अपनी औरत की शादी दुसरे मर्द के साथ करवानी पड़ती थी औरत को उससे भी महर मिलती थी और जब दूसरा मर्द तलाक देता था तभी मर्द के साथ दुबारा निकाह होना मुमकिन था और तब एक बार फिर औरत को मर्द से दुबारा निकाह के लिए नए सरे से महर दिया जाता था यानि औरत को तीन तलाक के बाद भी न केवल पति मिलता था बल्कि दो बार में महर के रूप में अच्छा धन मिल जाता था और इस काम में हर तरह से नुकसान मर्द का ही होता था मैं आप सभी से पूछना चाहता हूँ की जिस बीबी को आप जान से ज्यादा अजीज रखते हैं क्या आप दुसरे मर्द के साथ उसे शादी करने के लिए राजी हो सकते हैं जवाब है बिलकुल नहीं इसीलिए हलाला के डर से लोग अपनी पाकीज़ह बीबी को तीन तलाक नहीं देते थे क्योंकि वो जानते थे की बाद में उसे वापस पाना लोहे के चने चबाने जैसा था इसलिए तीन तलाक सिर्फ और सिर्फ मर्द के लिए सजा है औरत के लिए बिलकुल नहीं इस्लाम ने ही आज से चौदह सौ साल पहले औरत को हिस्सा मुक़र्रर किया था और उसे मर्दों की बराबरी का दर्जा दिया था जब कोई कानून था ही नहीं अगर पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें मुझे पता है की आप अच्छी पोस्ट शेयर करने में कंजूसी करेंगे

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