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SCS मुद्दा: चीन ने की जन युद्ध की अपील

विवादित दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर चीन ने समुद्र में जन युद्ध के लिए तैयारियों की अपील की ताकि समुद्री सुरक्षा खतरों का मुकाबला किया जा सके। वहीं, इसकी शीर्ष अदालत ने विदेशियों को चेतावनी दी है कि इस देश के समुद्री अधिकारों का उल्लंघन करने वाले लोग आपराधिक कार्यों के जिम्मेदार होंगे।

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक चीन के रक्षा मंत्री जनरल चांग वानकुआन ने समुद्री खतरों की चेतावनी दी और संप्रभुता की हिफाजत के लिए जनयुद्ध के लिए ठोस तैयारियों की अपील की। चांग ने कहा कि सेना, पुलिस और लोगों को राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए लामबंद होने की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चीनी सेना (पीएलए) बुलाए जाने के लिए हमेशा तैयार खड़ी रहेगी और लड़ने तथा जीतने में सक्षम होगी।

वहीं, विवादास्पद दक्षिण चीन सागर में चीन की दावेदारी खारिज करने वाला आपराधिक न्यायाधिकरण का फैसला निष्प्रभावी करने की कोशिश के तहत यहां के सुप्रीम कोर्ट ने एससीएस में देश के अधिकार क्षेत्र को पुन: पुष्ट करते हुए आज एक नियम जारी किया और उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले अन्य देशों को आपराधिक तौर पर जिम्मेदार ठहराए जाने की चेतावनी दी।

सुप्रीम पीपल्स कोर्ट (एसपीसी) ने समुद्री क्षेत्र पर चीन के अधिकारिक क्षेत्र को स्पष्ट करने के लिए न्यायिक व्याख्या करने वाला एक नियम जारी किया। यह व्याख्या चीन को समुद्री व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा एवं हितों की रक्षा करने और देश के अधिकार क्षेत्र वाले समुद्र क्षेत्रों पर एकीकृत प्रंबधन लागू करने के लिए एक स्पष्ट कानूनी आधार मुहैया कराती है।

आज से प्रभावी हो रहे इस नियम में कहा गया है कि यदि चीन या अन्य देशों के नागरिकों को चीन के अधिकार वाले समुद्री क्षेत्रों में अवैध शिकार करने या मछली पकड़ने या विलुप्तप्राय: वन्यजीवों की हत्या करने के मामले में शामिल पाया जाता है तो उन्हें आपराधिक तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

एसपीसी के बयान में कहा गया है, ‘न्यायिक अधिकार राष्ट्रीय संप्रभुता का एक अहम तत्व है। पीपल्स अदालतें चीन के समुद्री क्षेत्रों में सक्रिय तौर पर अपने अधिकार का प्रयोग करेंगी, समुद्री प्रबंधन कर्तव्यों को कानूनी रूप से निभाने के लिए प्रशासनिक विभागों का समर्थन करेंगी, चीनी नागरिकों एवं अन्य देशों के संबद्ध पक्षों के कानूनी अधिकारों की समान रक्षा करेंगी और चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता एवं समुद्री हितों की सुरक्षा करेंगी।’

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