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वीडियो: हालात ने शन्नो बेगम को बनाया दिल्ली की पहली उबर महिला ड्राइवर

नई दिल्ली: पति के मरने के बाद दिल्ली की शन्नों बेगम ने जब अपने चार बच्चों का पेट पालने और परिवार की जिम्मेवारी उठाने के लिए काम करना शुरू किया तो लोगों ने उन्हें तरह-तरह के तान मारे की आदमियों वाले काम क्यों सीख रही हो, तुमसे ये सब नहीं होगा। लेकिन जब शन्नों ने अपने बच्चों की खातिर काम करने की जिद्द ठान ली तो उन्हें ये सब नहीं रोक पाया।

शन्नों पढ़ी-लिखी नहीं थो तो कभी सब्जी का ठेला लगा और कभी लोगों के घरों में काम करती थी। हालांकि इससे वह अपने बच्चों के लिए पेटभर खाना तो ला सकती थी लेकिन बच्चों को पढ़ा-लिखा नहीं सकती थी। इसलिए शन्नों बेगम ने कुछ ऐसा करने का सोचा जिससे वह अपने बच्चों को पढ़ा सकें। इस लिए उन्होंने उबर ड्राइवर बनने की सोची और उसके लिए पढाई की।

दो बार दसवीं की परीक्षा दी। फिर उन्होंने आज़ाद फाउंडेशन के बारे में सुना जहाँ से उन्होंने गाड़ी चलानी और शहर की तमाम जगहों पर पहुंचने के लिए नक्शा पढ़ना भी सीखा। इसके अलावा शन्नों के ड्राइविंग के दौरान खुद की सुरक्षा करने के लिए सेल्फ डिफेन्स की शिक्षा ली। जिसके बाद वह शाखा कैब चलाने लगी, उसके बाद उन्होंने आजतक के लिए कैब चलाई। इस सफर की शुरुआत के 6 साल बाद शन्नों उबर के साथ जुडी और उनके लिए कैब चलाने लग पड़ी।

इस बारे में शन्नों कहती हैं कि वह डोमेस्टिक वायलेंस का शिकार रह चुकी हैं। उनके पति की मौत के बाद उनकी सास और अन्य लोगों ने उन्हें ये सब करने से बहुत रोका लेकिन उन्होंने ठान लिया था की वह अपने बच्चों की देख-रेख अच्छी तरह से करेंगी। शन्नो कहती हैं कि एक महिला को उबर ड्राइवर बनने के लिए ड्राइविंग और सेल्फ डिफेंस आना चाहिए।

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