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क़तर में खाने-पीने के समान की हो सकती है किल्लत, बाहरी लोगों को देश छोड़ने का फरमान

कतर से 7 देशों द्वारा राजनयिक रिश्ते तोड़ लिए जाने के बाद इस खाड़ी देश में रहने वाले लाखों लोगों पर गिरी गाज से उनकी जिंदगी प्रभावित हो रही है। प्राकृतिक गैस के सबसे बड़े उत्पादक कतर 99 फीसदी खाद्य आयात पर निर्भर है।

लिहाजा आने वाले दिनों में खाद्यान संकट को देखते हुए वहां लोग खाने-पीने की चीजों को खरीदने के लिए सुपर मार्कीट में टूट पड़े हैं। कतर की 22.4 लाख की आबादी पर इस नाकाबंदी का प्रभाव दिखने लगा है।

लोगों को आशंका है कि आने वाले दिनों में खाने-पीने और जरूरत की वस्तुओं की किल्लत हो सकती है। वहीं, इस खाड़ी देश में रहने वाले अरब देश के लोगों का भविष्य भी अधर में लटक गया है। नए निर्देशों के तहत उन्हें 2 हफ्तों में कतर को छोड़कर जाना होगा।

इसके अलवा मिस्र के 3 लाख नागरिकों का भविष्य भी अधर में है। गौरतलब है कि चरमपंथी आतंकी समूहों का समर्थन करने को लेकर बहरीन, सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, यमन, लीबिया और मालदीव ने सोमवार को कतर से राजनयिक रिश्ते तोड़ लिए हैं।

इन देशों ने कतर पर अल कायदा, आईएस और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे गुटों का समर्थन करने और खाड़ी के देशों में गड़बड़ी पैदा करने का आरोप लगाया। अरब देशों ने सोमवार सुबह कतर से अपने हवाई, समुद्री और सड़क संपर्क काटने का ऐलान कर दिया।

सऊदी अरब, यूएई और बहरीन ने अपने नागरिकों को कतर छोड़ने के लिए कहा है। इसके अलावा उन्हें कतर न जाने और कही से भी कतर न होते हुए आने की हिदायद दी है। हालांकि, कतर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। कतर के अधिकारियों ने बाजारों और सुपरमाकीर्टों में सामान खरीदने पहुंच रहे लोगों को धैर्य रखने को कहा है।

उन्होंने कहा कि देश में खाद्यान्न संकट नहीं है। इसके बाद कतर में जरूरी सामान की किल्लत पैदा हो गई है। वहीं, भारत ने सऊदी अरब सहित अरब देशों द्वारा कतर से राजनयिक संबंध खत्म करने को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) का आंतरिक मामला बताया है।

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