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सिमी के पांच कार्यकर्ता 11 साल के लंबे इंतजार के बाद कोर्ट से बरी, नहीं मिले कोई सबूत

इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के 5 कार्यकर्ताओं को एक सत्र अदालत ने 11 साल के लंबे अरसे के बाद बरी कर दिया है। इन पर लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंधों के साथ साल 2006 के मुंबई सीरियल ट्रेन धमाकों में संलिप्तता के आरोप थे।

सत्र अदालत के मजिस्ट्रेट ने इरफान अली अंजुमन सैयद, मोहम्मद नजीब अब्दुल राशिद बाकली, फिरोज अब्दुल लतीफ घासवाला, मोहम्मद अली मोहम्मद चाँद छीपा और इमरान निसार अहमद अंसारी को बरी करते हुए कहा कि अपराध शाखा (डीसीबी सीआईडी ​​यूनिट 11 ) ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

न्यायाधीश ने माना कि अभियोजन पक्ष प्रतिबंधित संगठन सिमी के सदस्यों पर लगे सभी आरोपों को साबित करने में विफल रहा। इन आरोपियों पर गुप्त बैठकों में भाग लेना और आपरेशन संचालन, साहित्य वितरण की गतिविधियों में शामिल होना और गुजरात के गोधरा में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान उत्तेजक क्लिप फैलाना जैसे आरोप लगाए गए थे जिन्हें साबित नहीं किया जा सका।

बरी किये गए व्यक्तियों में से एक फिरोज घासवाला पर आरडीएक्स रखने का आरोप लगाया गया था। जांच एजेंसियों ने आरोपियों का ट्रेन विस्फोटों के बाद पकड़ा था जिसमें 189 लोग मारे गए और 829 लोग घायल हुए थे। एजेंसी ने सिमी पर विस्फोटों को अंजाम देने का आरोप लगाया गया था।

पुलिस ने इस दौरान कई गिरफ्तारियां की थी जिसमें यह 5 कार्यकर्त्ता भी शामिल थे। सभी आरोपियों का तेहवार पठान और इशरत खान द्वारा प्रतिनिधित्व किया गया। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि लतीफ़ घासवाला ने ओसामा बिन लादेन द्वारा आयोजित प्रशिक्षण शिविर की सीडी खरीदी और उत्तेजक साहित्य को सिमी सदस्यों के बीच बांटा।

यह भी दावा किया गया था कि ट्रेन धमाकों के फरार आरोपी राहिल शेख के साथ घासवाला और चीप दोनों अवैध रूप से पाकिस्तान गए थे और वहां इनको बम बनाने और एके -47  चलाने की ट्रेनिंग लश्कर-ए-तैयबा ने दी थी। सईद और बाकली को उनकी वापसी के बाद घासवाला ने बाजार में आसानी से उपलब्ध सामग्री से बम बनाने में प्रशिक्षण दिया गया।

हालांकि, इन सब दावों के समर्थन में एजेंसी अदालत में कोई भी ठोस सबूत नहीं पेश कर पाई।

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