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अलीगढ़ में बड़े बूचड़खाने के ज़्यादातर कर्मचारी हिन्दू हैं, सभी को है रोज़गार छीन जाने का डर

उत्तर प्रदेश में बूचड़खानों पर लगे प्रतिबन्ध के बाद विश्वनाथन पिल्लई अपनी नौकरी को लेकर खासा परेशान हैं। 40 वर्षीय पिल्लै देश के सबसे बड़े फ्रिगेरियो कंर्वा एलाना लिमिटेड नामक मांस प्रसंस्करण इकाई में बतौर उत्पादन प्रमुख काम करते हैं। योगी सरकार की कार्यवाई के बाद उनके रोज़गार पर तलवार लटक रही है।

व्यापारियों ने स्थानीय मंडियों से जानवरों की खरीद-फरोख्त बंद कर दी है क्योंकि उन्हें डर है कि उन्हें लाने के दौरान रास्ते में हमला कर दिया जाएगा।

वहीँ अब किसान भी पशुओं को बेचना नहीं चाहते क्योंकि इसके दाम काफ़ी कम हो चले हैं। पिल्लई ने कहा मुझे नहीं पता कि अगर अपना संयंत्र बंद कर दिया जाए तो हमें कौन नौकरी देगा? दो बच्चों के पिता पिल्लै घर पर पत्नी के साथ रहते हैं जिनको 30 हजार रुपये वेतन मिलता है।

राजधानी दिल्ली से 150 किलोमीटर दूर अलीगढ़ के तालसपुर खुर्द गांव में 45 एकड़ में फैला यह संयंत्र 2,100 मजदूरों को रोजगार देता है जिनमें से ज्यादातर हिन्दू हैं। अब पिल्लई और दूसरे कर्मचारियों का भविष्य अँधेरे में है।

ऑल इंडिया मीट एंड लाइवस्टॉक एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने कहा कि हलाल वाली प्रक्रिया को अंजाम देने वाले कसाई को छोड़कर यहां लगभग सभी मजदूर हिन्दू हैं जो अपना नाम जाहिर नहीं करना चाहते।

आर्थिक लिहाज़ से यूपी भारत के कुल मांस निर्यात का लगभग 50 प्रतिशत का योगदान करता है और यह विशाल उद्योग 25 लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार मुहय्या कराता।

 

 

 

हालांकि मुख्यमंत्री ने कानूनन बूचड़खानों को आश्वस्त किया है कि उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। हाल ही में अलायंसंस में शामिल हुए महाप्रबंधक अयाज सिद्दीकी ने कहा कि साहिबाबाद, अलीगढ़ और उन्नाव में हमारी सभी तीन इकाइयां हैं और अभी भी प्रशासन के अधिकारी हमें परेशान करने आते हैं। देश के वार्षिक मांस का निर्यात 27,000 करोड़ रुपये का है जिसमें उत्तर प्रदेश के 15,000 करोड़ रुपये शामिल हैं। प्रतिबंध का मतलब कम से कम 11,350 करोड़ रुपये का राजस्व होता है।

 

 

 

 

अगर यूपी सरकार कारोबार पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक अध्यादेश पारित करती है तो एसोसिएशन कानूनी विकल्प पर विचार कर रही है। पिछले एक हफ्ते में सैकड़ों ‘अवैध’ बुचड्खानो को राज्य भर में सील कर दिया गया है जिनमें ज्यादातर मेरठ, बुलंदशहर, अलीगढ़ और आगरा हैं। पिछले एक हफ्ते में सरकार के इस कदम से छोटे व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हुआ है

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