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सोशल मीडिया पर रूह अफ़ज़ा की मिठास पर घोला जा रहा सांप्रदायिकता का जहर

घर-घर में इस्तेमाल होने वाले रूह अफ़ज़ा की मिठास को सांप्रदायिकता के जहर में बदलने की कोशिशें की जा रही है।

सोशल मीडिया पर लोग रूह अफ़ज़ा को धर्म के रंग में रंग कर दो समुदाय के लोगों में कड़वाहट पैदा करने की कोशिशें कर रहे हैं।

अब से पहले लोगों के लिए स्वाद के चीज़ होती थी रूह अफ़ज़ा। लोग सिर्फ इतना जानते थे की इसे गर्मियों में खुद को ठंडक देने के लिए पीया जाता है।

लेकिन अब रूह अफ़ज़ा को स्वाद से बदल क्र फसाद के लिए मशहूर किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर कुछ लोग ये बता रहे हैं की रूह अफजा ‘मुसलमान’ है।

इस महीने में रमजान चल रहे हैं और इस महीने निर्जला एकादशी भी आ रही है। इस दिन लोग बड़े चाव से रूह अफजा पीते हैं और लोगों को पिलाते हैं।

सोशल मीडिया पर कुछ हिंदूवादी संगठन के लोग कह रहे हैं कि भी  वक्त है हिंदू भाइयों जागो और बदलो। अगर हम रूह अफ़ज़ा खरीद कर पीयेंगे तो हमदर्द का मुसलमान मालिक बहुत खुश होगा।

सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि रूह अफज़ा 1906 से बाज़ार में बिक रहा है, लेकिन उसका धर्म जानने में 111 साल लग गए। खैर इस नफ़रत में भाजपा की राजनीति का कोई हाथ नहीं है,शायद।

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