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पाकिस्तान नहीं, इंडियन आर्मी की वजह से पैदा होते हैं कश्मीर में पत्थरबाज़: कविता कृष्णन

नई दिल्ली- कश्मीरी पत्थरबाज़ युवकों को लेकर देश में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। लोग पत्थरबाज़ों को पाकिस्तान परस्त और देशद्रोह कह रहे हैं। लेकिन सीपीआई (एमएल) नेता कविता कृष्णन ने कश्मीर में पत्थर फेंकने वाले युवाओं से सहानुभूति दिखाते हुए ट्वीट किया है। इस ट्वीट के बाद एक बार फिर कविता विवादों में आ गई हैं ।

कविता कृष्णन ने ट्वीट कर कहा है कि कश्मीर में पत्थर फेंकने वालों को पाकिस्तान पैदा नहीं करता है, इन्हें पैदा करते हैं घाटी में मौजूद भारतीय सेना के जवान। कश्मीर की समस्या को अलग नजरिये से देखने वाली कविता कृष्णन ने पत्थरबाजों पर ही अपने एक पुराने ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, ‘पत्थर फेंकने वाले कश्मीरी युवकों को पाकिस्तान जन्म नहीं देता है, ये कश्मीरी युवक कश्मीर में भारतीय सेना के सशस्त्र जवानों की मौजूदगी की वजह से पैदा होते हैं।’


कविता कृष्णन के इस ट्वीट के बाद लोगों का गुस्सा भड़क गया। ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए बाला जी सुब्रमणियम नाम के एक यूजर ने लिखा है, तो अब हमें क्या करना चाहिए? कश्मीर से सेना को बुला लेनी चाहिए, कश्मीर पाकिस्तान को दे देना चाहिए, निश्चित रुप से आप इससे खुश होंगी।

विशाल नाम के यूजर ने लिखा है, ‘ घाटी में जाकर ‘बेचारे कश्मीरियों’ के लिए मार्च निकालिए, कहां आप अपना समय व्यर्थ कर रही हैं भारत के बड़े-बड़े शहरों में रहकर।’

 

राजेन्द्र रैना नाम के एक शख्स ने लिखा है, ‘आपकी झूठ पर दया आती है, क्या आपको पता है कश्मीर में पत्थरबाजी 1953 से चल रही है, आप इस चलता है एटीट्यूड के साथ कैसे ट्वीट करती हैं।’


इससे पहले कविता कृष्णन ने आर्मी चीफ बिपिन रावत को खुली चिट्ठी लिखी थी और आर्मी चीफ के कश्मीरी नौजवानों को सेना के ऑपरेशन के दौरान दखल ना देने की चेतावनी की आलोचना की थी। कविता कृष्णन ने लिखा था कि वादी में भारतीय फौजों की मौजूदगी और उनका व्यवहार ही लोगों को सेना के खिलाफ कर देता है। कविता कृष्णन के मुताबिक भारत को कश्मीर समस्या का राजनीतिक समाधान निकालना चाहिए। और कश्मीर के लोगों का विश्वास जीतने के लिए सबसे पहले सेना को कश्मीर से वापस बुलाना चाहिए। कविता कृष्णन ने सेना में कुछ जवानों के सुसाइड करने पर भी सवाल उठाया था। दरअसल कश्मीर में सेना के ऑपरेशन के दौरान स्थानीय लोग सेना पर पत्थर फेंकने लगते हैं जिससे सेना को अपने ऑपरेशन को अंजाम तक ले जाने में परेशानी होती है।

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