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पढ़ाई पूरी करने अमेरिका जा रहे ज़िया हुसैन को प्लेन में नहीं चढ़ने दिया गया

लाहौर: लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैनेजमेंट साइंसेज से ग्रेजुएट और फुलब्राइट स्कॉलर सय्यद ज़िया हुसैन शाह को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब सर्दियों की छुट्टियों के बाद अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए वापस अमेरिका जाने के दौरान उन्हें विमान में सवार होने से रोक दिया गया।

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इस बारे में जिया ने बताया कि जब बोर्डिंग सेंटर पर मेरा टिकट चेक किया गया तो कर्मचारियों ने मुझे बताया कि मैं विमान में सवार नहीं हो सकता क्योंकि मेरी क्लीयरेंस नहीं है। लेकिन जब मैंने उनसे वजह पूछी तो उन्होंने मुझे अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से संपर्क करने की सलाह दी।

25 साल के जिया यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो के डीवीन्टी स्कूल में पोस्ट ग्रेजुएट के छात्र हैं, जहां वह प्रारंभिक इस्लामी सूफीवाद की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका से कराची वापसी पर जिया से फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने जांच की थी और उनसे पूछा गया था कि वे वहाँ (पाकिस्तान में) क्या करते हैं और अमरीका में क्या कर रहे हैं।

जिया के अनुसार, ‘उन्होंने मुझसे कहा था कि जब मैं वापस अमेरिका आऊँगा तो वह मुझसे आगे की पूछताछ करेंगे।

जब उनसे सवाल किया कि वह इस्लामी सूफीवाद से क्यों आकर्षित हुए तो जिया ने बताया कि पाकिस्तान में शिक्षा के लिहाज़ से इस तरह के अध्ययन का कोई विचार नहीं है। जबकि धर्म के बारे में ज्ञान और जागरूकता भी काफी कम है। इसलिए हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां धर्म पर बातचीत अक्सर चरमपंथ की ओर चली जाती है। उन्होंने कहा कि इसकी वजह दरअसल जानकारी का न होना है।

जिया ने बताया, ‘मैं काविश (Kavvish) के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने हेतु उचित योग्यता प्राप्त करना चाहता था’।

दरअसल जिया ने अपने 2 दोस्तों के साथ मिलकर 2014 में काविश की नींव रखी थी, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान में स्कूल के छात्रों में धार्मिक और सांस्कृतिक सहिष्णुता को बढ़ावा देना है।

 

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