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ट्रम्प के आने के बाद US पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या घटी, मुस्लिम विरोधी रुख है अहम वजह

अमेरिका में पढ़ाई की चाहत रखने वाले विदेशी आवेदकों की संख्या में इस बार भारी गिरावट आई है। सबसे कम आवेदन इस बार पश्चिम एशिया के छात्रों ने किया है। वजह है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी नीतियाँ मसलन ट्रेवल बैन, देश में इस्लामोफोबिया के बढ़ते मामले और प्रवासियों के लेकर उनका रुख।

देश के दस सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में इसका सीधा असर देखने को मिला है। यहां 27,000 छात्रों में सिर्फ 1900 अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं।

अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ कॉलेजियट रजिस्ट्रार के सर्वे के अनुसार, ग्रेजुएशन के लिए यहां आने वाले छात्रों की संख्‍या में ट्रंप के आदेश के बाद करीब 50 फीसद तक गिरावट दर्ज की गई है। इससे उन विषयों को लेकर चिंता बढ़ गई है जो सिर्फ अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाए जाते हैं।

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया और नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी का कहना है कि उनके यहां विदेशी छात्रों की संख्या ज्यादा रही है। इधर, पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष विम विवेल ने कहा कि पिछले सप्ताह हैदराबाद के 10 संभावित स्टूडेंट्स से उन्होंने मुलाकात की, लेकिन काउंसलिंग सेशन के दौरान अमेरिका में रहने को लेकर उनके अंदर डर दिखाई दिया। एक मुस्लिम छात्र ने कहा कि उसके पिता अमेरिका और इसके मुस्लिम विरोधी रवैये को लेकर डरे हुए हैं।

ओहायो यूनिवर्सिटी में आवेदकों की संख्या में 8.4 फीसदी की गिरावट आई है। आवेदकों में चीनी छात्रों की संख्या सबसे कम पाई गई है जो कि ट्रंप इफेक्ट को समर्थन नहीं देते।

वहीं कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की फ्रांसिस लेसली की चिंता अब यह है कि आवेदकों में से कितने स्टूडेंट वास्तव में ऐडमिशन लेंगे, क्योंकि कई यूनिवर्सिटी की डेडलाइन तब खत्म हुई थी जब ट्रंप का ट्रैवल बैन ऑर्डर नहीं आया था।

ओरेगन यूनिवर्सिटी में इस साल बेहद कम अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स ने आवेदन दिया है। विवेल हालांकि, यह भी कहते हैं कि नई दिल्ली और बेंगलुरु के स्टूडेंट्स की चिंता पढ़ाई में आने वाला खर्च है जो कि नोटबंदी का सीधा असर है।

आपको बता दें विदेशी छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था को हर साल करीब 32 अरब डॉलर का योगदान देते हैं। पिछले 10 सालों से अमेरिका में विदेशी छात्रों की संख्या बढ़ी थी। पिछले साल 10 लाख छात्र अमेरिका में पढ़ाई के लिए पहुंचे थे।

 

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