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SC: नेताओं की संपत्ति की जांच के लिए बनेगें फास्ट ट्रैक कोर्ट, केंद्र ने किया विरोध

सुप्रीम कोर्ट ने नेताओं की बेहिसाब संपत्ति की जांच के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की जरबदस्त वकालत की है। हालांकि केंद्र सरकार ने इसका कड़ा विरोध किया है। केंद्र सरकार ने कहा कि ऐसे मामलों में सीबीडीटी संतोषजनक काम कर रहा है जिसके लिए अलग से कोई व्यवस्था बनाने की जरूरत नहीं है।

अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जस्टिस जे चेल्मेश्वर और अब्दुल नजीर की पीठ के समक्ष यह बात मंगलवार को कही जब कोर्ट ने पूछा कि ऐसे नेताओं को आयकर कानून के तहत ही क्यों ट्राई किया जा रहा है। इसमें आपराधिक मामला क्यों नहीं चलना चाहिए। विशेष अदालत में त्वरित ट्रायल क्यों नहीं किया जाना चाहिए। जनता को पता लगना चाहिए कि संपत्ति कहां से और कैसे आई।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘कोर्ट ने कहा कि विधायक और सांसदों का काम हर समय लोगों की समस्याएं सुनने और सुलझाने का होता है। ऐसे में उनकी संपत्ति में इतनी तेजी से बढ़ोत्तरी कैसे हो गई? अगर यह बढ़ोत्तरी किसी बिजनेस की वजह से है तो उस पर भी सवाल उठता है। एक व्यक्ति विधायक या सांसद होते हुए बिजनेस कैसे कर सकता है? जनता को पता होना चाहिए कि नेता की आय का स्रोत क्या है।’

समाचार एजेंसी भाषा ने खबर दी है कि उच्चतम न्यायालय ने सरकार से सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए नई फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन के लिए कानून बनाने पर विचार करने को कहा है।

वही चार वर्ष विधि आयोग ने नेताओं के मुकदमे के लिए अलग से विशेष अदालतें बनाने के खिलाफ अपनी राय दी थी। आयोग का कहना था कि कानून की निगाह में सब बराबर हैं किसी को अगल करने के नहीं देखा जा सकता।

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