Wednesday , September 20 2017
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महिलाओं की सोच आज़ाद, उन पर नहीं थोपी जा सकती किसी और की मर्जी: सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली/शिमला: आज देश में जिस तरह के हालात बने हुए हैं उससे साफ़ जाहिर है कि देश के नागरिकों की ज़िन्दगी से शांति पूरी तरह से खत्म करने पर सरकार आमदा है। एक तरफ जहाँ आम आदमी की ज़िन्दगी में शान्ति ख़त्म होने के कगार पर है वहीँ सुप्रीम कोर्ट ने सालों से हिंसा और जुर्म का शिकार होती आ रही महिलाओं के अधिकारों की बात कही है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सवाल किया कि क्या इस देश में महिलाओं को शांति से जीने का अधिकार नहीं है?

सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल हिमाचल प्रदेश में हुई एक घटना के मामले में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता से किया है। याचिकाकर्ता को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 16 वर्षीय एक लड़की के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ करने और आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर करने के एक मामले में सात साल की कारावास की सजा सुनाई थी।

कोर्ट के इस फैसले को लेकर सुप्रीमकोर्ट पहुंचे आरोपी की अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए अदालत ने कहा है कि इस देश में क्या महिलाओं को शांति से जीने का अधिकार नहीं है? अदालत ने यह भी कहा है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी महिला पर प्रेम करने के लिए दबाव नहीं बना सकता, क्योंकि महिला की खुद की स्वतंत्र पसंद होती है।

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